21-February-2022


भ्रष्टाचार कितना बड़ा सवाल ? लोकसेवकों से त्रस्त क्यों हैं लोग ? क्यों होता है आये दिन बवाल, पढ़िए पूरा विश्लेषण



व्यवस्था में अव्यवस्था की मुनादी।। रायगढ़ शहर में वकीलों द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार आंदोलन जारी है। दरअसल यह आंदोलन भ्रष्टाचार के समग्र स्वरूप के विरुद्ध न होकर यह राजस्व विभाग में व्याप्त भ्र्ष्टाचार के खिलाफ आंदोलन है। 11 फरवरी को रायगढ़ तहसील कार्यालय में स्थानीय वकीलों ने तहसीलदार द्वारा किये गए दुर्व्यवहार के बाद काफी हंगामा किया था कुछ कर्मचारियों के साथ मारपीट भी की गई थी।

यह बात सिर्फ यहीं की नहीं है, कई बार अलग-अलग मौके पर इस तरह का बवाल होता आया है। कुछ दिन पहले सूरजपुर मेम और इससे पहले भी। राजस्व अमला लोगों के निशाने पर होता है। कोई नेता, वकील, पत्रकार हो या आम जनता। इन घटनाओं के आधार पर राजस्व विभाग के अधिकारी अपनी सुरक्षा की मांग भी कर रहे हैं लेकिन सवाल यह उठता है कि लोगों के टारगेट में अक्सर राजस्व विभाग के अधिकारी ही क्यों होते हैं ? और वकील इनके खिलाफ ही आंदोलन करते हैं।

अब सवाल यह है कि तहसील कार्यालय में व्यापत भ्र्ष्टाचार के खिलाफ आंदोलन क्यों है ? दरअसल तहसील कार्यालय हो या कोई भी आम जनता से जुड़े कार्यालय, जब जनता वहां जाती है तो उसकी परेशानियां कम होने के बजाय बढ़ जाती है। बिना पैसे के उनका काम नहीं होता है। यदि आप पैसा देने में सक्षम नहीं है तो आपकी जमीन दूसरे के नाम भी हो जाएगी बिना किसी रजिस्ट्री के। आम आदमी यहां सबसे ज्यादा प्रताड़ित होता है, हालांकि इसका एक हिस्सा वकील का भी होता है लेकिन वकालत एक व्यावसायिक कार्य है, पेशा है लेकिन राजस्व कर्मचारियों को तो वेतन मिलता है फिर आम लोगों से काम के बदले पैसा क्यों लिया जाता है? इसी सवाल पर रायगढ़ अधिवक्ता संघ यह आंदोलन कर रहा है और इसी आधार पर इस आंदोलन को उचित ठहराया जा रहा है।

सबसे पहले जो लोकसेवक या कर्मचारी हैं वे सरकार के काम करने के लिए हैं, सरकार का मतलब आमजन जिन्होंने अपने लोगों से सरकार बनवाई है यानि अधिकारी। आम लोगों के समस्या सुलझाने उन्हें उनके काम नियमतः आसान करने के लिए हैं और इस काम के लिए सरकार उन्हें पैसे वेतन के रूप में देती है, जाहिर सी बात है सरकार वह पैसा आम लोगों से लिये टैक्स से ही देती है। टैक्स पेयर देश या राज्य के सभी नागरिक होते हैं जो समान दुकानों से खरीदते हैं, चाहे माचिस की डिब्बी खरीदें या कफन, टैक्स देना होता है।

जब हम पहले ही किसी काम के लिए सरकार को पैसे दे चुके हैं तो फिर से उन्ही कामों के लिए हमे पैसे क्यों चुकाना ? इसे ऐसे समझिए कि आपने किसी ठेले से कोई सामान खरीद लिया, उसे पैसा दिया फिर कोई कहे कि समान उठाकर देने के लिए भी पैसे लगेंगे तो क्या आप पैसा देंगे ? यदि नहीं, तो यहां आप दो जगह पैसे क्यों देते हैं, पहले टैक्स के रूप में सरकार को फिर रिश्वत के रूप में अधिकारी को?

आमजन को यह भी समझना होगा कि जिसे आप अधिकारी बोल रहे है वह लोकसेवक है, वह हमारी सेवा के लिए है। आप उनके सेवा का शुल्क पहले ही सरकार को दे चुके हैं। अब सरकार उनसे अलग कोई सेवा ले रही हो तो सरकार उसके लिए फण्ड बनाये। जैसे कई अधिकारी यह भी कहते हैं कि यदि कोई नेता या मंत्री यहां आते हैं तो हमे नेताओं और मंत्रियों के लिए इंतजाम करना पड़ता है,हम उसका पैसा कहां से लाएं? लेकिन सवाल यह है कि उसके लिए हम पैसा क्यों दें ?

वकीलों के इस आंदोलन में कायदे से आम जन की सहभागिता होनी चाहिए, जबतक आमजन इस आंदोलन में अपनी भूमिका तय नहीं करेगा यह दो वर्गों का टकराव बनकर रह जायेगा, इस आंदोलन से जिसे फायदा मिलना चाहिए वह हितग्राही ही आंदोलन से गायब है ऐसे में कुछ बदलाव या लोगों की समस्याएं काम होती नहीं दिख रही है।













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