धरमजयगढ़ मुनादी (असलम खान)-
वर्ष 2019 जाने को है और इसी के साथ वर्ष 2020 के स्वागत की तैयारी भी जोरों पर है। वैसे तो न्यू ईयर सेलिब्रेशन आप अपने घरों पर ही कर सकते हैं लेकिन अगर इस इवेंट को घर से बाहर दूर किसी सूरम्य वादियों के बीच सेलिब्रेट किया जाएं तो बीते साल को अलविदा और नए साल के स्वागत के जश्न को आप यादगार बना सकते हैं। चौंकिए मत हम आपको देहरादून या कुल्लू-मनाली जाने को नहीं कह रहे हैं हम आपको धरमजयगढ़ के आसपास के खुबसूरती को भी देखने की बात कर रहे हैं। हम जानते हैं आप जैसे बहुत से लोग नए वर्ष का आनंद और स्वागत किसी सैर गाह पर करना चाहते हैं तो आइए जानते हैं धरमजयगढ़ के कुछ महत्वपूर्ण डेस्टिनेशन के बारे में जहां नए साल को कुछ खास अंदाज में से सेलिब्रेट किया जा सकता है ।
"पधारो हमारे धरमजयगढ़ की खूसूरत वादियों में"
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सलिहारी फाॅल:- प्रकृति की अनमोल विरासत जल की कला और नक्कासी आनंदमयी पदयात्रा तथ वृक्षों से आच्छादित पहाड़ के मनोहारी दृश्य सलिहारी फाल की यात्रा को मानसिक और शारीरिक दोनो तरह से आनंदमयी बनाते है.
धरमजयगढ़ से उत्तर पश्चिम में 31 कि.मी. दूर ग्राम पोरिया से 2 किमी पदयात्रा कर इस प्राकृतिक झरने तक पंहुचा जा सकता है इस स्थान पर पहुंचते ही आप अपनी समस्त थकान भूल जायेंगे/
धरातल से 105 फीट की उंचाई से पानी की विशाल जलधारा दुधिया जलधारा करतल ध्वनी के साथ गिरती है जिससे आसपास का वातावरण दिलकश नज़र आता है.

वोडराकछार पहाड़ी श्रृंखला के शैलचित्र एवं राॅककप :-
जिले में स्थित बोडराकछार के रौताईन ठाठा में मिले शैलचित्र मानव सभ्यता के विकाश को दर्शाने वाले प्राचीनतम प्रमाण है। खाशकर कटारी आमा के शैलाश्रय मे मिले राॅककप सबसे पुराने हो सकते है। यहाॅ मिले शैलचित्र एवं राॅककप में अदभूत एवं आश्चर्यजनक समानता है.
गगन चुंबी साल के विशाल हरे भरे वृक्ष, खिलखिलाती, इठलाती अपनी ही धुन में गाती पहाड़ों की चोटियों, अपनी ही संगीत की लय में थिरकते कोरिया और गरूण (गिरहोल) के फूल, दूर से झिलमिलाती रवाली पहाड़, लाम पहाड़ एवं गादी पहाड़ की चोटियों, बालों को सहलाती वस्त्रों को उड़ाती, पत्तों को फड़फड़ाती और पहाड़ी कोरवा जनजाति के झोपड़ियों को खड़खड़ाती सुंगधित हवा, मन को मोह लेने वाले और कविता की प्रेरणा देने वाले ऐसे धरमजयगढ़ में आपका स्वागत हैं।
यह वह क्षेत्र है जहाँ प्रकृति अपनी संपूर्णता में विद्यमान है जहां बड़ी-बड़ी ऊँचाईयाँ और शीतल वातावरण आत्मा को चरम शांति प्रदान करता है यहां के चित्ताकर्षक मनोहरी दृश्य शहर के अभ्यरत आँखों को मोह लेते है जहां हवा स्वच्छ है सितारे अधिक चमकदार होते है और जहां समय कब पंख लगाकर उड़ जाता है पता ही नहीं चलता ।

आज वनमंडल धरमजयगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता यहां पर्यटकों को आने के लिये आकर्षित करेगी। चांदी के समान चमकती सरितायें, झर-झर बहते हुये झरने वनो के बीच छोटे-छोटे गांव, खुले मैदान, हरे-भरे खेत, नीले रेग लिये छोटे-बड़े जलाशय, घाटियों में बलुवा पत्थरों की विशाल चट्टानें, वन मंडल धरमजयगढ़ की सुन्दरता में चार चांद लगा देते है और आप यहां आकर मंत्र मुग्ध हो जायेगें। प्राकृतिक सौंदर्य से विस्मित हो जाने के अलावा यहां पर मानव द्वारा बनाये गये दर्शनीय स्थल भी हैं, वन्य मंडल धरमजयगढ़ में पुरातात्विक भंडार और ओंगना एवं बनियारानी पहाड़ी की गुफाओं की चट्टानों में निर्मित शैल चित्र तथा माया पहाड़ पर निर्मित विशाल राॅककप भी दर्शनीय हैं।

