रायगढ़ मुनादी।
नगर निगम रायगढ़ की राजनीति को आसानी से समझना जरा टेढ़ी खीर है। एक तरफ जयंत ठेठवार को लेकर एक लॉबी मुस्तैद है तो एक तरफ कहा जा रहा है कि जयंत निगम की राजनीति से इतर राजनीत करना चाहते है वही दूसरी ओर की राजनीति यह कहती है कि जयंत ठेठवार सभापति की कुर्सी तक पहुंचने के लिए जो राजनीत सेट किया है यह समझना जरा मुश्किल ही नही कठिन भी है।
संगठन की राजनीति कहती है एक एक व्यक्ति दो पद का लाभ नही ले सकता है जबकि जयंत पहले ही जिला अध्यक्ष का पद संभाल रहे है और अब पार्षद भी है ऐसे में उनका सभापति बनाने को लेकर संगठन सहमत नही है संगठन चाहता है कि जयंत निगम की राजनीति से बाहर संगठन के लिए राजनीति करें। अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि संजय देवांगन और प्रभात साहू का नाम यूं ही बाहर नही आया है । इसके पीछे की राजनीति कुछ और कहती है।
यह भी अब कहा जा रहा है कि यदि जयंत के नाम पर मुहर लगने में कही मामूली अड़ंगा दिखाई देता है तो संजय देवांगन या प्रभात साहू के नाम सरप्राइज मुहर लग सकती है लेकिन इसके लिए बाकी के पार्षद तैयार नही होंगे ऐसी स्थिति में ही सलीम नियरिया को रिपीट किया जा सकता है। अंदर की जो खबर है उसके अनुसार सलीम नियरिया को सभापति की कुर्सी से अलग रखने पर मान मनव्वल या सुनियोजित जाल बिछाया गया है। इन सबमे यदि जोड़ तोड़ ठीक नही बैठ पाता है तो संजय देवांगन या प्रभात साहू दोनो में से किसी एक को अप्रत्याशित नतीजा सामने आता है तो फिर यह समझने में देर नही लगेगी की यह सब क्यों और कैसे हुआ।
फिलहाल यह सब एक कयास और उड़ती हवा भी कहा जा सकता है इसके इतर यह भी हो सकता है कि सर्व सम्मति से सलीम नियरिया सभापति बन जाएं लेकिन यह इतना आसान नही है।
फिलहाल सत्यनारायण शर्मा जो इसी के लिए शहर पहुंचे है और रायशुमारी को लेकर बैठक शुरू होने वाली है अब देखना है कि यहां सभापति का ऊंट किस करवट बैठता है और इसी बात से शहर की आगे की राजनीति फिंजा तय होगी। क्या सत्यनाराण शर्मा संगठनात्मक नियम के तहत सभापति बनाने में कामयाब होते है या ये भी जोड़ तोड़ की राजनीति में उलझ कर बन्द लिफाफा का किस्सा बना जाते हैं।

