लिखित में आश्वासन देकर भूल गए अधिकारी चुनाव बहिष्कार कर करेंगे चक्का जाम करने पर विचार कर रहे किसान
रायगढ़ मुनादी।
राजस्व विभाग में किस तरह अधिकारी कर्मचारियो की मनमानी का राज चलता है किस तरह यहां प्रकरण को दबाकर बैठ जाने का दस्तूर बन चुका है तमाम प्रशासनिक कसावट के बाद भी राजस्व महकमा सुधरने का नाम नही ले रहा है यही वजह है कि करीब 3 माह पूर्व अधिकारियों ने ग्रामीणों को लिखित आश्वासन दिया था। मामला निपटाना तो दूर इसके बाद अधिकारियों ने इस पर एक लाइन का काम नही किया।

ये है पूरा मामला कि राष्ट्रीय राजमार्ग में अधिग्रहित किए गए किसानों की भूमि का मुआवजा प्रकरण 3 माह में निपटारा करने का लिखित आश्वासन राजस्व विभाग के अधिकारियों द्वारा कलेक्टर रायगढ़ के निर्देश पर 28 अगस्त 2019 को दिया गया था और इस आश्वासन के आधार पर किसानों ने अपने घोषित आमरण अनशन को स्थगित किया था परंतु अधिकारी अपने लिखित आश्वासन को भूल गए और 3 माह का समय बीत जाने के बाद भी सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बावजूद आज तक किसान अपने जमीन के मुवावजाजा हेतु अधिकारियों के मुंह ताकते हुए किंकर्तव्यविमूढ़ हो गए हैं । इस परिस्थिति में आक्रोशित किसान आगामी पंचायत चुनाव को बहिष्कार करते हुए सड़क में बैठकर चक्का जाम करने पर विचार कर रहे हैं । इस परिस्थिति में देखना यह है कि जिला कलेक्टर एवं सारंगढ़ के राजस्व अधिकारी इन किसानों की भावनाओं को कितनी गंभीरता से लेते हैं और 28 अगस्त 2019 में दिए गए आश्वासन पूरा करने में दिसंबर 2019 बीतने के बाद नया साल 2020 आ जाने के बावजूद आज पर्यंत मुआवजा भुगतान नहीं करने के पीछे कारण क्या है ? इसे शायद अधिकारी ही बता पाएंगे फिलहाल यह बात प्रदेश के शीर्षस्थ अधिकारियों और शासन के जम्मेदार व्यक्तियों तक पहुंचाया जा रहा है कि भूपेश सरकार में किसानों की क्या दशा है ? आगे देखना है कि ग्राम खिचरी के किसानों को उनकी जमीन का मुआवजा भुगतान किया जाता है या केवल प्रशासनिक दगाबाजी तथा सरकारी औपचारिकताओं के पूरा करने में किसान गुमराह होते रहेंगे।

