रायगढ़ मुनादी।।
रायगढ़ नगर निगम में सभापति और महापौर का चुनाव कल होना है उसके लिए दांव पेंच शुरू हो गया है। हालांकि कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अभी पत्ते घोषित नहीं किये हैं लेकिन अंदरूनी खबरों के अनुसार दोनों पार्टियों ने अपने प्रत्याशियो का चयन कर लिया है। कांग्रेस से जहां लक्ष्मीन मिरी और जयंत ठेठवार का नाम सामने आ रहा है तो भाजपा से नवधा मिरी और पंकज कंकरवाल का नाम सामने आ रहा है लेकिन भाजपा की संख्या कम होने के कारण कयासों का दौर जारी है।
कहा जा रहा है कि भाजपा कांग्रेस में असंतोष और भितरघात के भरोसे है। उसको लगता है कि कांग्रेस में महापौर और सभापति के नाम की घोषणा के साथ ही असंतोष उभरेगा और उसका लाभ भाजपा को मिलेगा। संख्या बल के हिसाब से भाजपा के कुल 19 पार्षद चुने गए हैं जबकि तीन निर्दलीय पार्षद रिमझिम बबुआ मुक्तिनाथ, अशोक यादव और सोमेश साहू को अपने पीला में मिला लिया है इससे संख्या बढ़ कर 22 हो गया है लेकिन बहुमत के हिसाब से यह संख्या पर्याप्त नहीं है लेकिन उनका मानना है कि कांग्रेस में कई बार नाराजगी सतह ओर आई है उसका लाभ उन्हें मिल सकता है।
हालांकि संख्याबल के हिसाब से कांग्रेस के जीते हुए 24 पार्षद हैं और दो निर्दलीय कांग्रेस प्रवेश कर चुके हैं, ऐसे में उनके पास बहुमत का आंकड़ा हो गया है लेकिन अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए उन्होंने अपने दल के पार्षदों को पूरी के एक रिसोर्ट में रखा है। बताया जाता है कि यह सब सिर्फ इसलिए किया गया है ताकि कोई पार्षद बिदके नहीं। भाजपा भी यह मानने को तैयार नहीं कि कांग्रेस के पार्षद एकजुट रहेंगे।
चल सकते हैं यह दांव
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक भाजपा हर हाल में निगम में अपनी सरकार बनाने को मुस्तैद है और भाजपा को पूरी उम्मीद है कि शहर सरकार उनकी बन रही है और कांग्रेस से क्रॉस वोटिंग का पूरा चांस है जिसका फायदा उन्हें मिलेगा और सभापति उनका होगा।
वही दूसरी ओर कांग्रेस इस उम्मीद में है कि उमके पास 24 पार्षदों की टीम है और उनका एक भी पार्षद क्रॉस वोटिंग नही करेगा और शहर में कांग्रेस की सरकार बनेगी। फिलहाल यह मुकाबला कहा तक पहुंचता है और उसका अंजाम क्या होगा। बस एक रात का सवाल है फिर सब कुछ साफ हो जाएगा।
सभापति कांग्रेस से जयंत ठेठवार होंगे या सलीम नियरिया या फिर जोड़ तोड़ की राजनीति में भाजपा अपना परचम लहराती है। अंदर खाने से जो खबर निकल कर आ रही है वो ये भी भाजपा की ओर से अभी न तो पूर्व विधायक रोशनलाल अग्रवाल ने पत्ते खोले हैं और न ही विजय अग्रवाल ने अपना पत्ता खोला है।

