कांग्रेस के पास मात्र 3 पार्षद , भाजपा 9 पार्षदों के साथ बहुमत में

महासमुंद मुनादी।
नगरीय निकाय चुनाव में यह कहना गलत होगा कि यहां किसी पार्टी के बीच मुकाबला हुआ है। अगर ऐसा होता तो छत्तीसगढ़ कांग्रेस शासित प्रदेश में भाजपा कि ऐसी दुर्गति देखने को नहीं मिलती। कुछ ऐसा ही उदाहरण छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के नगरपालिका सराईपाली में देखने को मिली है, जहां वर्तमान चुनाव में भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ जीत दर्ज की थी। लेकिन जब सत्ता की बारी आई तो कांग्रेस ने यहां सत्ता जमा ली। यह बात लोगों के गले नहीं उतर रही है कि आखिर नगरीय निकाय चुनाव में टिकट बंटवारे से लेकर चुनाव लड़ने तक पार्टी की दखल रही, लेकिन कुर्सी कैसे छिन गई?
यहां अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस की जीत से हर कोई अवाक है।
सोमवार को अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में कांग्रेस से अमृत पटेल व भाजपा से चंद्रकुमार पटेल ने नामांकन दाखिल किया। 15 पार्षदों के मत से हुए इस निकाय अध्यक्ष चुनाव में भाजपा के खाते में 9 पार्षद थे जो सत्ता के लिए पूर्ण बहूमत था। लेकिन ऐसा क्या हुआ कि कांग्रेस के अमृत पटेल ने 8 मत के साथ जीत दर्ज की। महज 3 पार्षद की संख्या वाली कांग्रेस के पक्ष में 5 अन्य पार्षदों ने मतदान किया। प्रदेश में सराईपाली का जो रिजल्ट सामने आया है उसका जवाब न जनता के पास है नहीं जनप्रतिनिधि के पास यह राजनीतिक पाटियों के लिए चिंतनीय है? छत्तीसगढ़ के लोकतांत्रिक इतिहास में संभवत यह पहली बार हुआ है जब कोई दल में होते हुए भी सत्ता से बाहर हो गई और जिसके पास बहुमत का आंकड़ा ही नहीं वह सत्ता में काबिज हो गए भले ही वह नगरी निकाय के चुनाव के बाद क्यों ना हो लेकिन यह अपने आप में छत्तीसगढ़ के राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।

