रायगढ मुुनादी।
मोदी सरकार की कार्पोरेट परस्त मजदूर किसान विरोधी नीतियो के खिलाफ 8 जनवरी देशव्यापी बंद का मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने समर्थन किया है ।
आज जारी एक बयान मे पार्टी जिला सचिव कहा कि मोदी सरकार देश मे मजदूरो के श्रम कानून मे कार्पोरेट घरानों के हितो मे परिवर्तन कर श्रमिकों के अधिकारो मे कटौती कर रहे है।मजदूरो के ट्रेड यूनियनो के अधिकार को भी समाप्त करना चाहती है। अब उद्योगो मे स्थायी मजदूर के बदले निश्चित समयावधि रोजगार योजना (फिक्स टर्म एम्प्लायमेंट)मतलब जितने घंटो का काम होगा उतना ही समय तक मजदूर को रखा जायेगा यह नीति ठेका पद्धति से भी भयानक है।यह लागू होने के बाद श्रमिको के पास अपने अधिकारो के लिए संघर्ष का कोई भी विकल्प नही रह जायेगा।
जिला सचिव ने केन्द्र सरकार पर सार्वजनिक क्षेत्र की निजीकरण करने की मुहिम की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि मोदी सरकार मुनाफे चल रहे उद्योगो को सस्ते दरों मे निजी मालिक को बेच रही हैं। कोयला,इस्पात,रेल,विमान ,बीमा,संचार जैसे बुनियादी क्षेत्रो का निजीकरण कर देश की आर्थिक आत्मनिर्भरता को ही समाप्त कर रही है।
माकपा नेता ने कहा कि देश मे किसानो की स्थिति काफी दयनीय है।उनके फसल के वाजिब दाम किसानों को नही मिला रहा है।औसतन प्रति 38 मिनट मे एक किसान कर्ज के बोझ से आत्महत्या करने को विवश है।केन्द्र सरकार किसानो के कर्ज माफ करने के बदले उद्योग घराने का कर्ज माफ करने पर आमादा है।
पार्टी नेता ने मोदी सरकार पर विभाजन की राजनीति करने का आरोप लगाते हुये कहा कि सीएए, एनआरसी के जरिये वे हमारे संविधान की धर्मनिरपेक्ष के उसूलो के खिलाफ काम कर रहे है।अगर एनआरसी देश मे लागू होगा तो इससे सबसे ज्यादा गरीबों शरणार्थी लोग ही प्रभावित होंगे,जिनके पास दस्तावेज ही नही है।देश के कुल आबादी के 0.4 प्रतिशत घुसपैठियो को चिन्हित करने के पूरी जनता को अनिश्चियता की ओर धकेलने का काम मोदी सरकार इसलिए कर रही है ताकि जनता का ध्यान अपनी बुनियादी समस्याओ से हटाया जा सके।
मोदी सरकार की इन नीतियो के खिलाफ 8 जनवरी के हडताल का माकपा समर्थन करते हुये समाज के सभी से तबके से इसे सफल करने का अपील किया है।

