जशपुर मुनादी।
सोमवार को जिले के बगीचा नगरपंचायत में हुए अध्यक्ष उपाध्यक्ष के चुनाव में नगर में सबसे बड़ी सबसे पार्टी के रूप में उभरी भाजपा कैसे मात खाई इस बात की जब पड़ताल की गई तो कहानी चौका देने वाली सामने आई। इस पूरी कहानी में सत्ता के बिल्कुल नजदीक पहुंच चुकी भाजपा आखिरी आखिरी में सत्ता से बहुत दूर चली गयी क्योंकि यहां अपने अपनो के खिलाफ घात लगाए बैठे थे और जब मौका मिला तो धराशाही ही कर दिया
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बगीचा में हुए चुनाव और उस पर अगर कांग्रेस ने जोड़ तोड़ कर अपनी सरकार बचाई तो कहानी अगर सुनी सुनाई जाए तो बहुत कुछ है। जो जनता की नजर से सब कुछ बयां कर जा रहा है कि हुआ क्या है। अगर भाजपा के अंदर कांग्रेस ने सेंध लगाईं तो सबसे बड़ी बात यही की खेल ऊंचा हुआ है, और सबसे बड़ी बात की पार्षदों ने बूथ अंदर जो भी किया, पर एक बात यह भी है कि किसके लिए किया।लगातार बगीचा भाजपा के अंदर अपना वर्चस्व बनाये रखने की लड़ाई में कहीं भाजपा हार तो नहीं गई है।
हम आपको बता दें कि भाजपा से बलराम नागेश अध्यक्ष के लिए दावेदार के रूप में खड़े हुए थे। वहीँ उपाध्यक्ष पद के लिए भाजपा से बागी होकर खड़े हुए रामनिवास गुप्ता को बनाया गया था। हालांकि रामनिवास गुप्ता के बागी बनने के पीछे एक नेता के हठधर्मिता की भी अपनी कहानी रही है, हालांकि इस हठधर्मिता के सार पर व्यापारिक और संबंधों की कहानियों पर बातें हठधर्मिता की बात को सही बताया जाता रहा।
साथ ही बात यह भी रही की कुछ वार्डो पर किसी की मेहनत से बने बनाये भाजपा के वार्ड पर इन बड़े भाजपा नेताओ की गिद्धदृष्टि बनी रही। की कैसे मौका इन जगहों पर मिल जाए, तो सुनिये नगर सरकार में फिर से भाजपा हार गई है!
जैसे ही भाजपा के अंदर बलराम नागेश के नाम स्वीकारोक्ति हुई, एक पेंच झट से अद्दयक्ष के नाम का फंसाया जाने लगा। अब ये देखना होगा चेहरा कौन किसके पसंद का था और कैसे स्वीकरोक्ति में उत्तरोक्ति हुई।
हम जो बात बता रहे हैं ये वो आवाज है जो की गलियों से परचून की दुकानों से निकल कर आ रही है। जैसे ही घोषणा हुई वैसे कुछ बगीचा के भाजपा के कुछ सिरमौर बने नेताओं के मुंह से निकला फलाने ने धोखा दिया, जैसे इन्तजार बस इसी बात का हो की यह रिजल्ट आने वाला है, अब ये देखने वाली बात होगी कि ये रिएक्शन था एक्शन, या अपने को फिर से स्थापित करने का ऑप्शन।
जैसे ही भाजपा 10 सीटों की अनुमानतः जीत के साथ चुनाव में बढ़ रही थी, कुछ चेहरों पर वैसे वैसे शिकन बढ़ रही थी, और भाजपा कुछ सीटों पर नजदीकी अंतर से हार गई, और ज्यादा कहें तो कांग्रेस के अंदर तो अपनी साख और सरकार बचाने की सारी कवायद थी ही साथ ही प्रदेश में सरकार का दम्भ भी। प्रदेश के एकाध मंत्री भी नजदीकी नजर इस सीट पर रखे हुए थे।चर्चा में पैसों की भी बात है, पर बड़ी बात यह की इतने दिग्गजों के चेहरों वाली बगीचा में भाजपा ने 12 नम्बर वार्ड से प्रमोद गुप्ता के सामने किसी नेता के चेहरे को भी दांव पर नहीं लगाया।
फिलहाल तो भाजपा ने एक जांच दल बनाया है पर उसके पीछे रणनीति कूटनीति के हिस्से से ज्यादा लोगों को सरोकार के तख्तों में कुछ दीखता भी नहीं कि मैं भाजपा का बड़ा नेता मैं कि नेता तुम कैसे बन गए से बड़े काम के लिये कुछ और भी ज्यादा बयानों के मद्देनजर नहीं दीखता।

