रायगढ़ मुनादी।
नाम वापसी के आखिरी दिन आज जिले के सारंगढ जनपद क्षेत्र के 24 सीटों मे से कांग्रेस समर्थित चार प्रत्याशी निर्विरोध जनपद सदस्य चुने गए । वह भी भाजपा के गढ़ समझे जाने वाले सालर -मल्दा क्षेत्र में, और यह जानकर आप हैरान हो जाएंगे कि निर्विरोध होने वाले परिवार और नेताओं का नाम जानेंगे तो शायद हैरान हो जाएं और इसमें भाजपा नेताओं की भूमिका समझते देर नही लगेगी। निर्विरोध होने वालों में कांग्रेस के ग्रामीण जिला अध्यक्ष व वर्तमान जनपद उपाध्यक्ष अरूण मालाकार, अरूण मालाकार की धर्मपत्नी श्रीमती सरिता मालाकार व उनकी भाभी श्रीमती मंजू मालाकार निर्विरोध हुए हैं। और वह भी भाजपा के गढ़ समझे जाने वाले इस क्षेत्र से निर्विरोध जनपद सदस्य चुने गए हैं।
वहीं दूसरी ओर कोसीर क्षेत्र से विधायक पति गनपत जांगड़े व मल्दा क्षेत्र से श्रीमती किशन कन्हैया पटेल निर्विरोध चुनी गयीं हैं। एक ओर जहां सालर-मल्दा क्षेत्र मे मालाकार परिवार के तीन सदस्यों के निर्विरोध चुने जाते हैं तो सवाल ये उठता है कि क्या सिर्फ मालाकार परिवार के लिए ही था क्या कांग्रेस के पास प्रत्याशियो की कमी थी ? क्या यहां मालाकार परिवार और विधायक पति सहित 5 के लिए भाजपा के किन-किन भाजपा नेताओं का हाथ है यह यहां के जमीनी स्तर पर काम करने वाले भाजपा कार्यकताओ की जुबान पर है।
सूत्र बताते हैं कि इनके निर्विरोध कराए जाने में भाजपा के एक जिला पदाधिकारी के साथ साथ जिला पंचायत अध्यक्ष व भाजपा के पंचायत चुनाव प्रभारी अजेश पुरुषोत्तम अग्रवाल की महत्वपूर्ण भूमिका व शेटिंग मानी जा रही है।
वही दूसरी ओर विधायक पति के निर्विरोध निर्वाचित होने में अजेश अग्रवाल के निकट सहयोगी व विजनेस पार्टनर का नाम सामने आ रहा है। एक ही क्षेत्र से भाजपा नेताओं के सहयोग से चार -पांच कांग्रेसीयों के निर्विरोध चुने जाने से जहाँ एक ओर भाजपा समर्थित प्रत्याशियों मे निराशा व अपनी जीत के प्रति अनिश्चितता का भय पैदा हो गया है की मैदान में तो हैं कही कांग्रेस को जिताने पार्टी के नेताओ की भूमिका को लेकर सशंकित हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद दूसरी ओर भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं मे भाजपा नेताओं के प्रति आक्रोश दिखाई दे रहा है।
विधानसभा चुनाव में पचास हजार से अधिक मतों से करारी हार के बावजूद भाजपा के जिला व प्रदेश नेतृत्व की आंखे अभी भी नहीं खुली है। सारँगढ़ में प्रदेश व जिला नेतृत्व पार्टी के इन्हीं जयचंदो व मानसिंहो पर अब तक भरोसा करते चलते चले आ रहे हैं। और इतना कुछ होने के बाद भी संगठन की सारी जिम्मेदारी सौंपते आ रही है जिनकी वजह से इतनी सारी सीटों को कांग्रेस के खाते में निर्विरोध दे देते हैं। यहां यह कहना गलत नहीं होगा कि सारंगढ भाजपा की राजनिति व रणनीति कांग्रेसी तय करने लगें है। इन घटनाक्रम को देखकर तो यही पता चलता है।
यही स्थिति रहा और प्रदेश व जिला नेतृत्व असहाय होकर तमाशबीन रहा तो और इन्हीं जयचंदो पर निर्भर रहा तो आने वाले समय में भाजपा में भारी विद्रोह की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। आज की स्थिति को देखकर व समझकर भाजपा के कट्टर व जुझारू कार्यकर्ताओं के समझ मे यह बात आ गयी है कि पार्टी मे अनुशासन नाम की अब कोई चिज रही नहीं। शेटिंग की राजनिति में जो माहिर है उन्ही की संगठन में पकड़ है यहाँ स्थिति को देखकर कहा जा सकता है पार्टी में उन्ही का बोलबाला है व उसी को पद व संगठन की जिम्मेदारी से नवाजे जाते हैं ।

