एकता का बेहतरीन उदाहरण है करमा नृत्य, रायगढ़ के ग्राम बाईरडीह के कलाकार देंगे रायपुर में युवा उत्सव में प्रस्तुति
डॉ उषा किरण की मुनादी।
करमा नृत्य में छत्तीसगढ़ की अनमोल आदिवासी संस्कृति के विशेष रंग अपनी बहुरंगी छटा के साथ प्रगट होते हैं। करमा नृत्य में आदिवासियों की संस्कृति, परिवेश, जीवनशैली, वनीय जीवन की झलक दिखाई देती है। खेती किसानी के दिनों में ग्रामीण जनजीवन में परिश्रमशील आदिवासियों एवं किसानों के जीवन में उत्सवधर्मिता करमा नृत्य के रूप के फिजाओं में रंग घोलते हैं। करमा नृत्य 'कर्म देवता' के प्रति समर्पित है, अक्टूबर माह में करमा पेड़ की टहनी अखाड़ा में रोपित किया जाता है और उसकी पूजा की जाती है। करमा नृत्य-गीत में आदिवासियों की जीवनशैली में प्रेम, श्रृंगार एवं जीवन के विविध भाव अपने उम्दा रूपों में प्रगट होते हैं। करमा नृत्य-गीत में इन्हीं भावों को लिए रायगढ़ के लैलूंगा विकासखंड के ग्राम बाईरडीह के चाचा नेहरू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्र-छात्राएं स्वामी विवेकानंद की स्मृति में 12 से 14 जनवरी को रायपुर के साइंस कालेज मैदान में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय 'छत्तीसगढ़ युवा उत्सव' में अपनी प्रस्तुति देंगे।
करमा नृत्य-गीत में मृदंग की थाप पर सामूहिक रूप से कतारबद्ध होकर गोल घेरा बनाकर, आपस में हाथों में हाथ लिये एक साथ कदम आगे बढ़ाते हुए नृत्य करते हैं और एकता को मजबूत करने एवं शांति का संदेश देते हैं तथा समाज में समरसता से रहने की प्रेरणा भी देते हैं। करमा गीतों में जनजातियों का सहज-सरल जीवन दिखाई देता है और इन गीतों के माध्यम से वे अपनी खुशी और गम जाहिर करते हैं। महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में कान में बीडिय़ो, गले में सिक्के के आभूषण, पैर में पैड़ा, हाथ में कड़ा, सिर में कलिंगा, जुड़े में गजरा, माथे पर बिन्दी लगाकर श्रृंगार करती है। इन गीतों में उरांव एवं सादरी भाषा की बहुलता है, जिससे यह पुष्पित पल्लवित हुई है।

करमा नृत्य के विभिन्न प्रकार हैं, चाली करम में हाथों में हाथ लिये नृत्य करते हुए सभी गाते हैं-
सोने मोने करम है करम डांड़े
एक बिता डाइर लेगिन
राजी में उपासलय हाई करम डारे
देश के स्वतंत्रता आन्दोलन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अविस्मरणीय योगदान को गीत रूप में अभिव्यक्त करते करते हुए कहते हैं-
गाँधी रे गाँधी बाबा
दुनिया के आजाद कारै रे
बड़े-बड़े सिपाही बंदूक से लाड़ै रे
गांधी बाबा कानून से लाड़ै रे
वन्य पक्षी मैना के कलरव को जीवन से जोड़ते हुए कहते हैं-
मैना रे मैना, सलो मैना
चल मैना जाब रे रैनी के डाँड़ रे
राजा रानी हाथी घोड़ा सपरय
हम कइसे जाब रे रैनी के डाँड़ रे
रसिका करम में ननद भाभी के आपसी नोक-झोंक, मनुहार, उनके रिश्तों की मधुरता एवं संवाद को गीत रूप में प्रस्तुत करते हुए कहते हैं-
बाँस परेता नु बाँस ओस
चोचा बड़े-बड़े छते न रई
टुनकी धराय नास गो
बौगी धराय नास गो
बड़े-बड़े छतेना रई
जिसमें ननद अपनी भाभी से कहती है कि बाँस के वनों में बड़े बड़े खुखड़ी (मशरूम)लगे हैं भाभी, बड़े टोकरी पकड़ो भाभी, बड़े-बड़े खुखड़ी लगे हैं।
एसन जंबू पानी, एसन जंबू पानी
झरिया-झरिया जंबू पानी रे, जंबू मानती खतेरा
गीत में प्रश्न किया जाता है कि जामुन कहाँ लगे हैं, उत्तर में यह कहते हैं कि झरना-झरना के किनारे जामुन पक रहे हैं।
उसगो करम, नवाखानी में नवान्न की पूजा करते समय किया जाता है। जिसमें खुशी जाहिर करते हुए वे गीत गाते है-
छोटे मोटे रंगैनी, सात बरन फुले
रंगैनी झबारला डारी बहुरा तरे
जिसमें यह कहते हैं कि छोटे रंगीन फूल सात रंग के खिलते हैं, ये इतनी अधिक संख्या में खिलते हैं कि डाली फूलों से ढक जाती है।
लहुसिया करम में प्रेम की भावनाएं अभिव्यक्त होती है-
पी पियो पियो, डारी में बैसल पियो,
पियो रे डारी के मति भाँगबे
जिसमें पिया पिया बोलने वाली डाल में बैठी पहाड़ी चिडिय़ा कहती है कि डाली को नहीं तोडऩा क्योंकि डाली सोना का है और पत्ती चांदी का।
जेठवारी करम, गर्मी के दिनों में किया जाने वाला करम है, जिसमें प्राकृतिक वन के सौंदर्य को व्यक्त किया गया है-
कोमडख़ा पुईदा, धोपे धोपा पुईदा, पेलो जिया,
टांगरकी रई, तोखे एराय पेलो, मोक्खे एराय पेलो
एका नापे एम्बा लगी
जिसमें कहा गया है कि कोइनार साग गुच्छे में फूला हुआ है, तोड़ लो और खाकर देखो कि कितना स्वाद है।
वहीं उदयपुरिया करम लयबद्ध होता है-
एका पेलो पैसा गा धरी रे, कड़मा नू छुनूर बई
चेड़ा पेल्लो पैसा गा धरी रे, कड़े मान छुनुर बई
जिसमें ये कहते हैं कि कौन लड़की पैसे रखते है, जिसके सिक्के की खनक सुनाई देती है।
बिरिझिंया करम में कहते हैं कि -
केकारो लाल मुर्गा बोले रे रमझम
राजा का लाल मुर्गा, बोले रे रमझम
मुर्गा बोले घरे-घरे मिंजुर बोल मड़ुवा पहार गोई, मुर्गा बोले घरे-घरे
गंगपुरिया करम में बाईरडीह स्थित अपने स्कूल के संबंध में गीत गाते हुए कहते है कि-
स्कूल हमर बाईरडीह रे, तहसील लैलूंगा जिला रायगढ़
थाना हमर लैलूंगा रे, तहसील लैलूगा जिला रायगढ़ रे
चाचा नेहरू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बाईरडीह की अनिता तिग्गा करमा नृत्य में मांदर बजा रही हैं, जो आदिवासी समाज में महिलाओं के सशक्तिकरण को बखूबी प्रदर्शित करता है। अनिता तिग्गा ने कहा कि शासन की ओर से आदिवासी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए आदिवासी नृत्य महोत्सव एक महत्वपूर्ण कदम रहा है। उन्होंने कहा कि युवा उत्सव में शामिल होने के लिए हम सभी बहुत उत्सुक है।
कलाकार अलिशा पन्ना ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि रायपुर शहर नहीं देखी हूं आज तक, पहली बार इतने बड़े कार्यक्रम युवा उत्सव में शामिल होने जा रही हूं तो बहुत अच्छा लग रहा है। कलाकार अमिता टोप्पो ने कहा कि हम सब उस क्षण का बेसब्री से इंतजार कर रहे है, जब हम रायपुर जायेंगे और अपनी प्रस्तुति देंगे। मक्सिमा तिर्की ने कहा कि हम युवाओं को छत्तीसगढ़ी संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए विशेष रूप से आगे आना चाहिए। इस अवसर पर इलियाजर एक्का, सुशीला पन्ना, विनीता लकड़ा, अर्चिता एक्का, अल्फा एक्का, सूरज पन्ना, ज्योति खेस, दीपक कुजूर, प्रधान टोप्पो, निमंति टोप्पो, दिव्य प्रतिमा केरकेट्टा, अंजना टोप्पो उपस्थित थे।

