जशपुर मुनादी।।
पत्थलगांव में रायगढ़ निवासी प्रमोद अग्रवाल की एक ज़मीन को लेकर पिछले कई दिनों से लगातार यह भ्रम फैलाई जा रही है कि उनके द्वारा ज़मीन गलत तरीके से बेची जा रही है। इससे परेशान ज़मीन के मालिक प्रमोद अग्रवाल खुद मय दस्तावेज सामने आए और उन्होंने बिंदुवार सारी जानकारी मुनादी को दी। उनका कहना है कि इस मामले में कई साल केस लड़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट तक ने उनके हक में फैसला दिया है और सरकारी अधिकारियों ने इस ज़मीन पर खुद खड़ा होकर कब्जा दिलवाया है, लेकिन कुछ लोगों द्वारा द्वेषवश गलत प्रचार और शिकायत कर हमें परेशान करने की कोशिश की जा रही है जो गलत और तथ्यहीन है।
उन्होंने आगे बताया कि इस ज़मीन का पट्टा बनवारी लालबके नाम से 5 जून 1978 में कलेक्टर रायगढ़ द्वारा दी गई थी जिसका पंजीयन 15 जून 1978 में हुई । 18 जनवरी 1984 में पत्ता से संबंधित जमीन रजिस्ट्री करवाई गई। 11 अप्रैल 1989 अपर आयुक्त बिलासपुर द्वारा हमारे हक़ में फैसला दिया गया। इसके बाद चले केस में 17 मार्च 1998 में माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा हमारे हक़ में फैसला दिया गया। कलेक्टर जशपुर द्वारा 5 अप्रैल 2018 को हमें आयुक्त बिलासपुर व तमाम राजस्व अधिकारियों के समक्ष ज़मीन की डिग्री और कब्जा दिलाई गई। सभी माननीय न्यायालयों ने माना है कि यह ज़मीन निर्विवाद रूप से हमारी है। इस ज़मीन की बिक्री के लिए जब पिछले वर्ष कलेक्टर जशपुर को आवेदन दिया गया था तब कलेक्टर ने स्वयं जवाब दिया था कि इसमें अनुमति की आवश्यकता नहीं है क्योंकि इस जमीन की रजिस्ट्री 10 साल पूर्व की है।


कुछ लोग बेवजह इस जमीन के बारे में अनर्गल शिकायत और प्रचार कर रहे हैं जो गलत है। हमने सभी दस्तावेज और साक्ष्यों के साथ सभी संबंधित अधिकारियों को समस्त दस्तावेज दिए हैं और उन्हें तथ्यों से अवगत भी कराया है। इस तरह के भ्रामक प्रचार सिर्फ परेशान करने के उद्द्येश्य से करना गलत है। उन्होंने दावा किया कि जिस किसी को भी इस जमीन के संबंध में संदेह हो रायगढ़ स्थित हमारे कार्यालय से पूरा दस्तावेज ले जा सकता है और उसकी पड़ताल कर सकता है।

