जशपुर मुनादी।
कलेक्टर साहब आपके वादे के मुताबिक परीक्षा से पहले मुझे ई ट्राईसाईकिल दिलवा देते तो मैं परीक्षा अच्छे से देता, और अच्छे अंक ले आता। आप चौंकिए मत ये आवाज एक दिव्यांग आदिवासी छात्र आशेस्वर राम की है, जो कक्षा 12वीं का विधार्थी है, और बगीचा हाइस्कूल में पढ़ रहा है। जब आप इसकी दास्ताँ सुनेंगे और देखेंगे साथ ही महसूस करेंगे, तो पढ़ाई के प्रति इस बच्चे के जज्बे को सलाम भी करने लगेंगे।
आशेश्वर राम ने बताया कि वो बगीचा से 12 किलोमीटर दूर जुरुडाँड पंचायत का रहने वाला है, और रोजाना वह इस हाथ से खींचने वाले ट्राइसाइकिल से आना जाना करता है। वह सुबह ही वह अपने स्कूल के लिए घर से निकल जाता है कि पढ़ाई करना है, कुछ कर के दिखाना है। मगर हाथों के बल से ट्राइसाइकिल खींचते खिंचाते कई बार उसका शारीरिक बल जवाब दे जाता है, रास्ते में कई जगह रुकता है, सुस्ताता है, फिर हांथो से ट्राइसाइकिल थामते चलाते स्कूल तक समयानुसार पहुंच ही जाता है।
इस दिव्यांग छात्र आशेश्वर राम ने हमें यह भी बताया की कुछ महीने पहले जशपुर के कलेक्टर साहब से आवेदन के साथ मिला था। उन्होंने जशपुर समाज कल्याण विभाग को ई ट्राइसाइकिल तत्काल उपलब्ध कराने को कहा था, वहीँ समाज कल्याण विभाग ने उसे यह कह दिया कि विभाग से मिलने वाला जशपुर में अभी ई ट्राइसाइकिल खत्म है, परीक्षा से पहले दिलवा देंगे। जाहिर है अब छात्र का परीक्षा 2 मार्च से प्रारंभ होने वाला है, और उसके सामने समय पर परीक्षा में पहुँचने की चुनौती है तो हमने भी मुनादी के कैमरे से ही छात्र का निवेदन कैद किया, वो इस उम्मीद से कि इस छात्र की मदद के लिए शासकीय योजनाएं कागजों से निकलकर अब यथार्थ पर फलीभूत होंगी।
बहरहाल मसला अब यह है कि योजनाएं अगर ऐसे दिव्यांग जन के कल्याण के लिए है, तो सुविधा से वो मरहूम क्यों है। क्योंकि इस दिव्यांग आदिवासी छात्र का जज्बा तो यही कह रहा कि वो भी भारत का सुन्दर और सबल भविष्य गढ़ने निकला है।

