07-April-2020


इनका कहना है कि व्यस्तम जिंदगी में परिवारिक महत्व और प्रेम का आईना है लॉक डाउन ....पढें पूरी खबर



संयुक्त परिवार के महत्व और आपसी प्रेम में ईष्वरीय शक्ति का आभास कराता यह 21 दिवशीय लॉक डाउन निश्चित ही हमे कोरोना पर विजय दिलाएगी हम सब का लक्ष्य संकल्प के साथ पूरा होगा।

रायगढ़ मुनादी।

देश की अग्रणी समाजसेवी संस्था लायनेस क्लब मिडटाउन रायगढ़ की ऊर्जावान अध्यक्ष महिला शक्ति की प्रतीक कविता अग्रवाल ने लॉक डाउन को संयुक्त परिवार के प्रेम और जरूरत का एहसास कराने वाला समय बताया है।कविता अग्रवाल से जब लॉक डाउन के सम्बंध में चर्चा की गई तो उन्होंने आपसी पारिवारिक प्रेम को प्रगाढ़ करते हुए 21 दिन घर मे रहकर सोशल दूरी के माध्यम से इस महामारी पर जीत दर्ज करने की बात कही।
नारी शक्ति की आधार कविता अग्रवाल ने कहा कि भागमभाग की जिंदगी में हम अपनो से दूर हो गए थे।पैसे की भूख और विलासिता ने इस दूरी को और बढ़ा दिया था लेकिन पिछले 14 दिनों के अनुभव ने यह सिद्ध कर दिया कि भोग विलासिता और धन दौलत से बढ़कर पारिवारिक प्रेम और आपसी सामंजस्य है।कविता अग्रवाल ने आगे कहा कि आज हम 1,2 जोड़ी कपड़ो में ही दिन निकाल रहे है,3 टाइम घर का भोजन पूरे परिवार जनों के मध्य खाकर आत्म संतुष्टि मिल रही है,पैसे की भुख लगभग खत्म सी हो गई है और चारो तरफ आपसी सद्भावना दिख रही है।घर मे रहकर हम घर को स्वर्ग समझ रहे है और घरेलू उपायों से ही घर को मंदिर करने में लगे है।इस महामारी ने मानव का मानव के प्रति प्रेम पैदा किया है जो किसी भी परिस्थितियों में सम्भव नही था।
श्रीमती अग्रवाल ने आगे कहा कि इस महामारी से तो हम जीत ही लेंगे क्योकि हमारे देश और प्रदेश की नेतृत्व मजबूत हाथों में है।देवदूत के रूप में कार्य करने वाले हमारे डॉक्टर्स,नर्सेस,पुलिस और प्रशासन के साथ सभी स्वमसेवियो ने पूरे विश्व को दिखा दिया कि भारत की एकता और अखंडता आज भी पूरी दुनिया मे नम्बर एक है।जहां पूरा देश हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री जी के एक आवाज में कुछ भी करने को तैयार है वही हमारे प्रदेश के मुखिया आदरणीय भूपेश बघेल जी के मार्गदर्शन में कोरोना के 10 मरीज में से 9 पूर्ण रूप से स्वस्थ होकर अपने घर पहुँच पूरे विश्व मे छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया।
कविता अग्रवाल का कहना है कि यह महामारी निश्चित रूप से हमारे लिए घातक और अहितकारी है फिर भी इस महामारी की वजह से हम अपनो से जुड़ने में कामयाब हुए।यह एक विडम्बना ही है कि जहां इस महामारी से पूरा विश्व डगमगा रहा है वही हमारा देश जगमगा रहा है।अर्थ,काम,मोह,लोभ की जगह हमारे देश मे प्रेम,सद्भाव,करुणा और परोपकार की गंगा बह रही है।








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