नजरिये की मुनादी।।
केंद्र सरकार ने कोरोना संकट से उपजे आर्थिक समस्या से निपटने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इन निर्णयों में राष्ट्रपति सहित तमाम सांसदों के वेतन में 30 प्रतिशत की कटौती के अलावा सांसदों की सांसद निधि का स्थगन का भी निर्णय शामिल किया गया है। हालांकि कांग्रेस पार्टी ने इसका विरोध किया है लेकिन कई सांसद भी दबे सुर में विरोध के राग अलाप रहे हैं। उनका कहना है कि यदि हम कुछ कर ही नहीं पाएंगे तो लोग भी हमसे दूर हो जाएंगे।
सरकार ने मीडिया को बताया कि सांसदों की निधि 2 वर्ष के लिए स्थगित किए जाने से सरकार को 7909 करोड़ मिलेंगे। सांसदों को प्रतिवर्ष 5 करोड़ रुपये सांसद निधि के बतौर दिया जाता है जिससे सांसद अपने चुनाव क्षेत्र में विकास के कार्य करवाते हैं। इससे सांसद का न सिर्फ क्षेत्र में साख रहता है बल्कि लोगों से जुड़े रहने और क्षेत्र के विकास में योगदान देकर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मोहल्ले में हैंड पंप से लेकर सड़क और बड़े निर्माण कार्य भी सांसद निधि से कराए जाते हैं।
कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को सरकार के सामने पांच सुझाव रखा है जिससे देश में आर्थिक बचत की जा सकती है। सोनिया गांधी ने ये 5 सुझाव सरकार को दिया हैं । पहला, सरकारी व PSU विज्ञापनों पर 2 साल के लिये रोक, दूसरा, Central Vista परियोजना को स्थगित करें यह 20 हजार करोड़ की परियोजना है जो नगरों के सौंदर्यीकरण से जुड़ा है, तीसरा, Expenditure बजट में 30% की कमी की जाये चौथा, सभी सरकारी विदेशी यात्राओं पर रोक लगी जाय तथा पांचवां, PM CARES की मदद को PM-NRF में हस्तांरित किया जाये।
हालांकि उन्होंने सांसद निधि के बारे में कुछ नहीं कहा है, लेकिन कहा जा रहा है कि इससे हजारों करोड़ की बचत होगी जिससे देश कोरोना के वर्तमान और भावी संकट से मजबूती के साथ लड़ सकती है।
सरकार सोनिया गांधी के इन सुझावों को माने या न माने लेकिन सांसद निधि स्थगित करने के बजाय उसे कम कर दे और इन सुझावों पर भी विचार करे तो बेहतर परिणाम सामने आ सकते हैं। आने वाले दिनों में आर्थिक मोर्चे पर सरकार को दो दो हाथ करना होगा। पहले से ही मंदी और आर्थिक तंगी से जूझ रही देश के लिए यह दोतरफा मार होगा।

