09-April-2020


सरकार से उद्योगों ने की अपील, ऐसे खोलें लॉक डाउन, उद्योगों को लगे मरहम, प्रदेश में स्थिति को देखकर हो फैसला



भिलाई नगर मुनादी।।

छत्तीसगढ़ लघु एवं सहायक उद्योग संघ के महासचिव के. के. झा ने 15 अप्रैल से लॉकडाउन खत्म किए जाने एवं छोटे उद्योगों को खोले जाने की मांग की है। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से उन्होंने अनुरोध किया है कि जिन उद्योगों में 25 से कम श्रमिक हैं उन्हें खोले जाने की अनुमति प्रदान की जाए। साथ ही सभी ऑफिस, दुकानें भी कम से कम एक शिफ्ट में खोला जाए।

उन्होंने कहा है कि प्रदेश में कोरोना वायरस पर पूरी तरह नियंत्रण है। ऐसी स्थिति में ट्रायल के रूप में एक शिफ्ट में उद्योग खोलकर उद्योग जगत को राहत पहुंचाई जा सकती है। श्री झा ने कहा कि लॉकडाउन के बाद उद्योगों में तालाबंदी की स्थिति है। अब श्रमिकों को वेतन भुगतान करने का समय आ गया है।

प्रदेश की सीमा सील रखी जाए

    

श्री झा ने कहा है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव ने अपने साहसिक निर्णय एवं सूझबूझ से प्रदेश में कोरोना वायरस को पूरी तरह मात दे दी है। पूरे विश्व में आज छत्तीसगढ़ का डंका बज रहा है। ऐसी स्थिति में यहां के उद्योग क्यों बंद रहें। मुख्यमंत्री पहले भी मंदी के दौर से प्रदेश को निकाल चुके हैं। इस समय भी वे अपने साहसिक निर्णयों से उद्योगों को मंदी की मार से बचा लेंगे।अब जब लॉकडाउन की सीमा 14 अप्रैल को खत्म होने जा रही है तो वे चाहते हैं कि छोटे उद्योग जिनमें कम से कम 25 श्रमिक हो उन्हें कम से कम एक शिफ्ट में खोला जाए। लॉकडाउन समाप्त होने के बावजूद प्रदेश की सीमा सील रखी जाए ताकि दूसरे प्रदेश के लोगों का आवागमन न हो सके।

विधायकों ने दिया आश्वासन

   

श्री झा ने बताया कि उन्होंने क्षेत्रीय विधायक देवेंद्र यादव एवं दुर्ग शहर के विधायक अरूण वोरा से बात की है तथा उन्हें उद्योग जगत को होने वाली परेशानियों से अवगत कराया है। दोनों विधायकों ने आश्वस्त किया है कि इस संदर्भ में मुख्यमंत्री से बात करेंगे तथा यथासंभव उनकी बात रखने का प्रयास करेंगे। गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू से भी बात करने का प्रयास वे कर रहे हैं। प्रदेश के सभी औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भी उन्होंने बात की है। सभी कि यही मांग है उद्योग शुरू किए जाए। ट्रायल के तौर पर जिन उद्योगों में तीन शिफ्ट में काम होता है वहां पहले एक शिफ्ट में ही काम शुरू किया जाए। उद्योगों में सोशल डिस्टेंस तो पहले से ही मेंटेन होता चला आ रहा है इसलिए किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी। उद्योगों के साथ-साथ ऑफिस को भी खोलने की अनुमति दें ताकि उद्योग धीरे-धीरे सुचारू रूप से प्रारंभ हो सके।

उद्योग जगत को भारी आर्थिक क्षति

श्री झा ने कहा कि उनका मानना है कि लॉकडाउन की स्थिति में हम श्रमिकों को पैसा तो दे सकते हैं लेकिन रोजगार नहीं दे सकते। श्रमिक घर में बैठे रहेंगे तो उद्योग संभालना मुश्किल हो जाएगा। वर्तमान में वे काफी डरे हुए हैं। उन्हें मानसिक स्तर पर काम करने के लिए तैयार करने में समय लगेगा। श्रमिक भी फोन कर बता रहे हैं कि वे घर पर बैठकर परेशान हो गए हैं। वे काम करना चाहते हैं। यदि एक शिफ्ट में श्रमिकों को बुलाया जाएगा तो मना नहीं करेंगे।वैसे भी वर्तमान में जो स्थिति है उसे देखते हुए उद्योगों को सुचारू रूप से आरंभ होने में 1 से 2 माह लग जाएंगे, जिसके कारण उद्योगपतियों को भारी आर्थिक क्षति का अनुमान है।








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