उड़ीसा सीमा पर स्थित जशपुर का लावाकेरा राहत कैम्प जिले भर में आदर्श राहत कैम्प का नमूना बनता जा रहा है। यहाँ रहने वाले करीब 100 लोगो को घर जैसा माहौल मिल रहा है ।ये हम नही कह रहे बल्कि ये कहना है बीते 25 मार्च से ठहरे सौ से ज्यादा कामगारों और मजदूरों का ।
इससे पहले कि हम आपको उनकी बात सुनाए पहले ये बता दें कि 24 मार्च को लॉक डाउन के बाद जब दिगर प्रदेशो में कल कारखाने बंन्द होने लगे साथ ही साथ रोडवेज की सेवाएं भी बंन्द हो गयी तब यहाँ काम करने वाले मजदूरों ने अपने अपने घर पहुंचने पैदल चलना शुरू कर दिया।पैदल चलते चलते करीब 100 मजदूर उड़ीसा में मुख्य मार्ग से लावाकेरा पहुँचे । पंचायत को जब इतने सारे लोगों के आने की सूचना मिली तो लॉक डाउन का पालन करते हुए पंचायत ने प्रशासन की अनुमति लेकर इन्हें लावाकेरा में ही रोक लिया और यहाँ के हाई स्कूल भवन में इन्हें आश्रय दिया।
आज इन्हें आश्रय में रहते कई दिन हो गए लेकिन इन्हें यहाँ थोड़ी सी भी परेशानी नही हैं। इनकी माने तो यहाँ रहने वाले कई सारे लोग यूपी से हैं तो कई प्रदेश के ही दूसरे जिले के रहने वाले हैं और इन्हें यहाँ इनकी रूचि के हिसाब से खाने दिए जा रहे हैं।
हमने यूपी से ठहरे हुए कुछ लोगो से बात की तो उन्होंने बताया कि उनकी रूचि के हिसाब से पंचायत इन्हें चावल की जगह रोटियां दे रहा है जबकि जिन्हें चावल पसन्द है उनके लिए चावल का इंतज़ाम है ।इन्होंने बताया कि यहां समय समय पर इन्हें पूड़ी ,सलाद भी दिए जा रहे है।बात चीत के दौरान उन्होंने बताया कि जैसा खाना उन्हें घर मे मिलता है वैसा ही खाना उन्हें यहाँ दिये जा रहे है। सोशल डिस्टनसिंग के मद्देनजर सभी के लिए अलग अलग साबुन तेल के भी इंतज़ाम किये गए हैं।
आप भी सुनिये इनका क्या कहना है और देखिये किस तरह सोशल डिस्टेंसिन्ग के साथ आदर्श प्रस्तुत कर रहा है ये राहत शिविर

