11-April-2020


स्वास्थकर्मी तड़पती रही, उसका पति रोता रहा कोई डॉक्टर नहीं आया, फिर निजी अस्पताल में किया भर्ती लेकिन वह बच न सकी, पति चिल्लाया - क्या इसीलिए ………. पढ़िए पूरी खबर



असंवेदनशीलता की मुनादी।।

जनता कर्फ्यू के दिन हम सबने स्वास्थकर्मियों के सम्मान में ताली, थाली, घंटी और घंटा बज लेकिन क्या वह सम्मान दिल से था या राजनैतिक लोलुपता ? यह सवाल इसलिए क्योंकि मेडिकल कॉलेज में फार्मासिस्ट पद पर कार्यरत जब एक महिला जब मौत की दहलीज पर पड़ी कराह रही थी तब उसे देखने न तो उसके साथी डॉक्टर्स आये और न ही किसी जी संवेदना जगी। वाक्या मध्यप्रदेश के शिवपुरी का है।

मेडिकल कॉलेज में फार्मासिस्ट के पद पर तैनात वंदना तिवारी को काम के दौरान ब्रेन हैमरेज हो गया क्योंकि coronavirus के खौफ के बीच वो लगातार दूसरों के लिए काम करती रही। ब्रेन हैमरेज के बाद उन्हें वहीं भर्ती कराया गया जहां वह ड्यूटी पर तैनात थी लेकिन 24 घंटे तक उन्हें देखने कोई डॉक्टर नहीं आया। इस दौरान उन्होंने सबसे गुहार लगाया, यहां तक कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक पहुंचे लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। थक हारकर उन्होंने अपनी पत्नी को बिरला हॉस्पिटल ग्वालियर में भर्ती कराया लेकिन तबतक बहुत देर हो चुकी थी। फार्मासिस्ट वंदना तिवारी की मौत हो गई।

अपनी पत्नी की मौत के बाद वंदना के पति बिफर पड़े उन्होंने जयारोग्य अस्पताल के डॉक्टर्स के संवेदनहीनता को लेकर उन्हें खूब खरी खोटी सुनाई वहीं वहां के कमिश्नर और मुख्यमंत्री के संवेदनहीनता पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर ये थाली और घंटा किसके लिए बजाया था ? क्या इसी दिन के लिए ? जिस अस्पताल में वंदना काम करती थी वहां के डॉक्टर्स 24 घंटे तक उसका प्राथमिक उपचार तृक शुरू नहीं कर सके । वंदना कोरोना मरीजों के लिए नॉनस्टॉप काम करती रही लेकिन उसकी फिक्र किसी ने नहीं की। यह पता भी नहीं चल रहा था कि उसे हुआ क्या है।

वंदना के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन का यह रवैया देखा तो उन्हें ग्वालियर के बिरला हॉस्पिटल में भर्ती कराया। वहां के डॉक्टर अभिषेक चौहान ने जब इलाज शुरू किया और एमआरआई कराई इसके बाद पता चला कि वंदना को ब्रेन हेमरेज हुआ है। तत्काल आपरेशन करना होगा। बिरला हॉस्पिटल के डॉक्टरो ने वंदना के ब्रेन का आपरेशन किया गया, लेकिन वह कोमा में चली गई थी। जिसके बाद उसकी मौत हो गई।

पति ने आरोप लगाया है कि वंदना के विभाग ने उनकी कोई मदद नहीं की। शिवपुरी कलेक्टर ने हाल चाल तक नहीं जाना। शिवपुरी मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. इला गुजरिया सिर्फ मदद करने का आश्वासन देती रही लेकिन कोई मदद नहीं की। ग्वालियर में डॉक्टरों ने इलाज नहीं किया। ग्वालियर कलेक्टर और ग्वालियर कमिश्नर ने कोई मदद नहीं की। कथित संवेदनशील मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी उनके अपील पर कोई ध्यान नहीं दिया। अंततः वंदना तिवारी ने दम तोड़ दिया। उन्होंने यहां तक कह डाला कि यह तो हत्या है।








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