रायगढ़ मुनादी।।
सालों से विवादित सारंगढ़ के धान खरीदी केंद्र फिर से सुर्खियों में हैं। पहले इन केंद्रों को घोटाले के लिए जाना जाता था लेकिन इस बार मिलर्स ने कलेक्टर को पत्र लिखकर गताडीह, छिंद, जशपुर जैसे धन खरीदी केंद्रों से मिलिंग के लिए धन का उठाव नहीं करने की बात कही है। उनका कहना है कि इन केंद्रों पर रखे धान गुणवत्ता विहीन हैं ऐसे में उसकी मिलिंग संभव ही नहीं है। क्योंकि मिलिंग के बाद उसका धान रिजेक्ट कर दिया जाएगा।
रायगढ़ के राइस मिलर्स एसोसिएशन ने कलेक्टर को लिखे पत्र में 6 समस्या बताई है जिसमें महत्वपूर्ण समस्या धान खरीदी केंद्रों में पड़े धान की गुणवत्ता है। मुनादी को एक वीडियो भी मिला है जो खरीदी केंद्रों में रखे धान का है। उसमें दिखाया गया है कि ज्यादातर धान के बोरे में फंगस लगा है तो कई बोरे के धान पत्थर की तरह हो गए हैं। ऐसे में धान की मिलिंग होना ही मुश्किल है।
देखिये धान की क्वालिटी -
यहां से धान मिलिंग होने के बाद जशपुर जिले ले जाया जाएगा। मिलर्स का कहना है कि वहां जाने के बाद चावल का रिजेक्शन तय है ऐसे में हमें वह चावल भी वापस लाना पड़ेगा। जब इसके परिवहन का का भाड़ा प्रशासन नहीं दे रही है तो हमारे लिए यह दो तरफा नुकसान का मामला हो जाएगा।
वैसे इस साल भी इन केंद्रों में ज्यादा धान खरीदने का मामला सामने आया था जिसकी जांच एसडीएम सारंगढ़ द्वारा की गई थी। इससे पहले गताडीह धान खरीदी केंद्र को लेकर कई बार सवाल भी उठे और इसके छींटे सारंगढ़ के विधायक पति गणपत जांगड़े की तरफ भी पड़े। कहा यह भी गया कि उनके प्रभाव के कारण इन केंद्रों में ज्यादा धन खरीदी की गई लेकिन जांच की घोषणा के बाद मामला वहीं रुक रहा। लेकिन अब मिलर्स द्वारा इस तरह के कदम उठाने के बाद फिर से सारंगढ़ धान खरीदी लेन्द्र विवादों के केंद्र में हैं।

