जशपुर मुनादी//
छग में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की अचानक आयी बाढ़ के बाद प्रशासन ने जहाँ कई इलाकों को सीलबंद कर दिया है और किसी को घर से नही निकलने की सख्त हिदायतें जारी की जा रही हैं वही जशपुर के ग्रामीण अंचलों में बगैर सरकारी सख्ती और बगैर किसी अपील के अपने गांवों को पूरी तरह सीलबंद कर दिया है।गाँव से न कोई बाहर जाएगा न बाहर का कोई आदमी गाँव जाएगा याने लॉक डाउन मतलब लॉक डाउन । हम उन गावों की सीमाओं पर पहुँचे जहाँ ग्रामीणों की अघोषित सीलबन्दी जारी है ।ग्रामीण पूरी तरह समझ गए हैं कि कोरोना पर फिजिकल डिस्टनसिंग के जरिये ही विजय पाया जा सकता है इसलिए सजगता और जागरूकता की मिशाल कायम करते हुए इन्होंने न तो सरकारी अपील का इंतज़ार किया न ही इन्हें किसी को ये बताना पड़ा कि घर से या गाँव से बाहर नही जाना है।
ऐसा केवल एक गांव में नही हुआ है बल्कि जशपुर जिले के सैंकड़ों गाँवों में यही स्थिति है ।प्रधानमंत्री द्वारा 21 दिनों के लिए लॉक डाउन की घोषणा के बाद से ही यहाँ इस तरह के सीलबन्दी के नजारे दिखने शुरू हो गए थे लेकिन कोरबा जिले के कटघोरा में अचानक 21 कोरोना मरीजों की पुष्टि हो जाने की खबर आने के बाद ग्रामीणों ने अपने द्वारा बनाये गए सीलबन्दी के नियमो में और ज्यादा कडाई कर दिया है । दरअसल यह जानना जरूरी है कि आखिर ग्रामीणों में इतनी सजगता का संचार कैसे हुआ इसका कारण ये है कि जशपुर में शुरू से ही पलायन की संस्कृति रही है और आज भी यहाँ के हजारों लोग देश के उन शहरों में रोजगार या मजदूरी करते हैं जो शहर देश के हॉटस्पॉट शहर में तब्दील हो गए हैं ।दिल्ली,मुंबई,गोवा,केरल,जैसे हॉटस्पॉट शहरों में जशपुर के हजारों लोग काम करते हैं ।जब इन शहरों में कोरोना वायरस फैलने की खबर जशपुर के गावों में पहुँची तो ग्रामीणों के होश उड़ गए और जब कोरोना संकट के दौरान उन मजदूरों की घरवापसी शुरू हुई तो ग्रामीणों ने उन्हें गाँव की सीमा में ही रोकना शुरू कर दिया और उन्हें घर जाने से पहले अस्पताल भेजा ताकि कम से यह पता चल जाय कि गोवा, दिल्ली,मुंबई से आने वाला सख्श कहीं कोरोना संक्रमित तो नही है ।
देखिये सीलबन्दी का लाईव वीडियो और जानिए आखिर क्यों हुई सीलबन्दी.

