प्रतापपुर मुनादी।। मुकेश गोयल की रिपोर्ट
प्रतापपुर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत सेमराखुर्द में कठिनाई से जीवन यापन करने वाला भोला यादव एक आंख से तो पत्नी एक हाथ से दिव्यांग है। बामुश्किल भरण पोषण कर छोटे से कच्चे कमरे में परिवार के साथ रहने को मजबूर इन्हें अभी तक प्रधानमंत्री आवास का भी लाभ नही मिला है। इतना ही नही पंचायत ने छलावा करते हुए घटिया शौचालय का भी निर्माण कराया जो अब किसी काम का नहीं है।
एक ओर कुदरत तो दूसरी ओर प्रशासनिक योजनाओं में भ्र्ष्टाचार की मार पड़ रही है इस असहाय परिवार पर। ग्राम पंचायत सेमराखुर्द के अंतर्गत पोड़ी में रहने वाला भोला यादव स्वयं दिव्यांग होने के साथ उसकी पत्नी सरस्वती यादव एक हाथ से दिव्यांग है । बेटी मानसिक रूप से अस्वस्थ्य,बस एक बेटा शारीरिक रूप से ठीक है जो गांव के सरकारी स्कूल में पहली कक्षा में पढ़ता है। यह पूरा परिवार बामुश्किल मात्र 10 फ़ीट लंबे चौड़े कमरे में रहने को मजबूर है। प्रधानमंत्री आवास के लिए उसने कई मर्तबा ग्राम सरपंच सचिव से गुहार लगाई लेकिन अभी तक उसका नाम आवास के लिए तय नहीं किया गया है। अभी वह जिस छोटे से कमरे में निवास करता है वह भी टूटने के कगार पर है। भोला यादव छोटे छोटे काम कर अपने परिवार के लिए पर्याप्त व्यवस्था भी नही जुटा पाता, क्योंकि पत्नी के भी दिव्यांग होने से वह उसकी मदद नही कर पाती। इस कठिन परिस्थिति में यह भी चिंताजनक हालात है कि सरस्वती के दाहिने हाथ के पंजे नहीं होने से उसका अधार कार्ड नहीं बन सका है, जिससे महिला के तौर पर मिलने वाली योजना से वह वंचित है। बड़ा लड़का नरेश खुटहन पारा के स्कूल में कक्षा पहली में पढ़ाई करता है तो बिटिया गुड़ी जो मानसिक रोग के कारण न चल पाती है और न ही बोल पाती है । इस विषम परिस्थिति में एक ओर परिवार परेशानियों से जूझ रहा है तो दूसरी ओर शासकीय योजना में गड़बड़ करते हुए पंचायत के जिम्मेदार लोग भी उसके साथ छलावा कर रहे है। जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण शासन से स्वीकृत घटिया शौचालय की स्थिति देख कर लगाया जा सकता है। इसने कई मर्तबा आवास के लिए पंचायत प्रतिनिधियों के समक्ष गुहार भी लगाई लेकिन पंचायत ने इसे छोड़ अन्य समर्थ परिवार का आवास स्वीकृत करा दिया और इसके नाम को लगातार प्रतीक्षा सूची में डालते रहे। आज भोला के पास छोटे छोटे काम के साथ शासन की योजना में सिर्फ राशन कार्ड का सहारा है जिससे हर महीने मिलने वाले राशन से उसका गुजारा होता है वह भी कई बार कम पड़ जाता है। अगर मानवीय नजीरिये से भी देखा जाए तो ग्राम पंचायत के जिम्मेदार पदाधिकारी के साथ विकासखंड के अधिकारियों को भी इस प्रकार असहाय परिवार की मदद के लिए आगे बढ़ कर पहल करनी चाहिए।

