ग्राउंड जीरो से मुकेश गोयल की रिपोर्ट
प्रतापपुर मुनादी।। लॉकडाउन के दौरान हाथियों के व्यवहार में परिवर्तन होने एवं उनके शांत होने का दावा करने वाली संस्था भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के प्रोजेक्ट रिसर्चर का दावा पूरी तरह से खोखला निकला। लॉक डाउन के दौरान हाथियों के व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया है और न ही हाथियों से नुकसान होने में कोई कमी आई है। पिछले एक माह से प्रतापपुर-अम्बिकापुर के मध्य विचरण कर रहे हाथियों ने कई एकड़ गन्ना, गेहूं, धान, उड़द सहित सब्जी की खेती को नुकसान पहुंचाया है और हाथियों का विचरण गांव के आसपास पूर्ववत हो रहा है। जिसमें ग्रामीण अपनी फसल बचाने के लिए पहले की तरह घरों से निकल हाथियों से आमना-सामना कर रहे है।
उत्तर छत्तीसगढ़ में हाथियों के व्यवहार, प्रसार के साथ हाथी व इंसानों के बीच परस्पर प्रभाव को लेकर बेहतर प्रबंधन करने के लिए छत्तीसगढ़ वन विभाग का देहरादून की भारतीय वन्यजीव संस्थान के साथ लगभग ढाई वर्ष पूर्व एक करार हुआ था, जिसके तहत उक्त संस्थान जुलाई 2017 से सरगुजा व आसपास क्षेत्र में हाथियों को लेकर अपना अध्ययन करने का दावा कर रही है। इसी दावे के अनुसार कुछ दिन पूर्व इस संस्थान के एक रिसर्चर ने यह दावा किया कि लॉकडाउन के दौरान ग्रामीण के घरों पर रहने के कारण हाथियों के व्यवहार में काफी परिवर्तन आया है। अब हाथी काफी शांत हो गए है, क्योंकि लॉक डाउन के कारण इंसान जंगल की ओर नहीं जा रहे है। जिससे हाथी भी इंसानों को शांत देखते हुए बस्ती के करीब नहीं आ रहे है। ग्रामीण इन दिनों सायंकाल घरों में कैद हो जा रहे है, इंसानों की जंगल की ओर रुख नही करने से हाथी अब घर भी कम तोड़ रहे है और हाथी जल स्रोत सहित धूलों से खेल रहे है। इस प्रकार दावों को उक्त संस्थान के प्रतिनिधि ने कई समाचार पत्रों में सुर्खियों के साथ प्रकाशित भी कराया। आज इस संस्थान के प्रतिनिधि के द्वारा किये गए दावे की पोल इस तरह खुल रही है !!!
कई एकड़ में लगी फसल व सब्जियों का हुआ है नुकसान

इन दावों के बाद जब वास्तविक हालात की जानकारी के लिए वर्तमान में हाथी प्रभावित क्षेत्र की जानकारी जुटाई गई तो आंकड़े न केवल चौकाने वाले थे बल्कि उक्त संस्थान द्वारा किये जा रहे दावे के विपरीत सामान्य तौर पर हाथियों का व्यवहार क्षेत्र में जैसा रहता है वैसा ही सुनने को मिला। संस्थान के इस दावे के विपरीत जब वन विभाग के वन सर्किल धरमपुर, खड़गवां, सोनगरा से हालात का जायजा लिया तो नुकसान भी लॉक डाउन से पहले की तरह वैसे ही थे। इस समय 15 हाथियों का दल प्रतापपुर वन परिक्षेत्र में तबाही मचाते हुए सूरजपुर वन परिक्षेत्र के तमोर सर्किल में ठहरे हुए है। इससे पहले यह गजदल लगभग एक माह पूर्व घुई रेंज से निकलकर प्रतापपुर रेंज में प्रवेश किये थे।

यह गजदल धरमपुर सर्किल से खड़गवां सर्किल होते हुए सोनगरा सर्किल निकल गए। इस दौरान इस गजदल ने कई किसानों की फसल को भी नुकसान पहुंचाया। तीनों सर्किल से मिले आंकड़ों के अनुसार इस गजदल ने लगभग 100 से ऊपर किसानों की फसल को नुकसान पहुंचाया है जिसमें विभाग ने 80 किसानों की क्षति का आंकलन किया है। इसमें खड़गवां सर्किल के अंतर्गत बोझा, मायापुर 2 में सर्वाधिक 50 से ऊपर मामले में विभाग ने 31 मामलों के प्रकरण तैयार किये है। सोनगरा सर्किल के अंतर्गत सोनगरा, कांसदोहर, झिंगादोहर, कछुवा दोहर, सारसताल में फसल क्षति के 29 मामले सामने आए है। जबकि धरमपुर सर्किल के बगड़ा, धरमपुर, गौरा, सिंघरा, मदननगर व गणेशपुर में 25 के अलग मामले है। तो वही सूरजपुर रेंज के बुंदिया सर्किल में भी 6 किसानों के फसल के नुकसान के मामले सामने आ रहे है। इसमें हाथियों ने न केवल जंगल के समीप के खेत बल्कि बस्ती के खेतों की फसल को भी नुकसान पहुंचाया है, जो कई एकड़ में है।

इस फसल में गन्ना के साथ गेहूं, धान, मूंगफली, उड़द, तरबूज, करेला, टमाटर व अन्य फसल है। इन आंकड़ों को देखकर सहज अंदाज लगाया जा सकता है कि संस्थान के उक्त प्रतिनिधि का दावा सच्चाई से परे हटकर सिर्फ बन्द कमरे में किया गया दावा है। इतना ही नहीं एक अन्य हाथियों का दल घुई परिक्षेत्र में भी विचरण कर रहा है, जो कि उस रेंज में आने वाले कई गांव में फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। इन दलों से अलग दो अन्य दंतैल टुकुडांड़ सर्किल में लगातार फसल क्षति तो गणेशपुर, कनकनगर, सिंघरा क्षेत्र में बहरादेव भी फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है। इस पूरे क्षेत्र में खुद वन कर्मचारी भी भारतीय वन्यजीव संस्थान के दावों पर आश्चर्य व्यक्त कर रहे है। इन तमाम मामलों को देखे तो देहरादून की संस्था का किया हुआ दावा आखिर किस आधार पर है ? मामला यहीं नहीं है इस संस्थान को छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा दी जा रही बड़ी रकम के बदले क्या यह संस्थान इसी प्रकार के दावों के आंकड़े उच्चधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत कर रही है। अगर ऐसा है तो इसकी जांच की भी आवश्यकता है।

इसके बाद संस्थान के द्वारा लॉकडाउन के दौरान हाथी के व्यवहार परिवर्तन को लेकर किये गए एक ओर दावा का जल्द ही होगा खुलासा। खबरों के लिए पढ़ते रहिये मुनादी डॉट कॉम......

