26-April-2020


पढ़ना जरूरी है …कोरोना वॉरियर्स डॉक्टरों के साथ हिंसा का अपराध- जानिए एक एक नियम, वाकिफ होइए कानून की बारीकियों से



जशपुर मुनादी।।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जशपुर के सचिव श्री अमित जिंदल ने वर्तमान महामारी कोरोना को लेकर प्रेस के माध्यम से नवीन कानूनी पहलुओं की जानकारी देते हुए बताया कि महामहिम राष्ट्रपति ने दिनांक 22-4- 2020 को महामारी संशोधन अध्यादेश 20 20 पारित किया। जिसमें धारा 2 ख में यह प्रावधान है कि कोई व्यक्ति किसी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के विरुद्ध हिंसा का कोई भी कार्य या संपत्ति को किसी प्रकार की हानि या नुकसान करने के किसी कार्य में संलग्न नहीं होगा तथा ऐसे कार्य के दुष्प्रेरण करने वाले व्यक्ति को धारा 3 के अनुसार कम से कम 3 माह जो 5 वर्ष तक का हो सकेगा के कारावास तथा जुर्माने से जो कम से कम ₹50000 जो ₹200000 तक का हो सकेगा से दंडित किया जाएगा। परंतु यदि हिंसा के कार्य के फल स्वरुप किसी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता को घोर उपहती अर्थात गंभीर चोट लग जाती है, तो ऐसा करने वाले व्यक्ति को कम से कम छह माह के कारावास जो 7 वर्ष तक का हो सकेगा तथा जुर्माने से जो कम से कम ₹100000 जो ₹500000 तक का हो सकेगा दंडित किया जाएगा। श्री जिंदल ने बताया कि इस अध्यादेश में हिंसा का कार्य का व्यापक अर्थ है। इसमें स्वास्थ्य सेवा प्रदाता को तंग करना, उसे चिकित्सीय परिसर या अन्यथा किसी स्थान में हानि नुकसान क्षति अभी त्रास करना या उसके जीवन को खतरा कारित करना, उसे उसके कार्य के निर्वहन में बाधा कारित करना, उसके कब्जे की किसी संपत्ति को नुकसान या हानि करना शामिल है। श्री अमित जिंदल ने आगे बताया कि ऐसा अपराध धारा 3 क के अनुसार संगेय, अजमानतिय, न्यूनतम निरीक्षक पद श्रेणी के अधिकारी द्वारा अन्वेषण योग्य होगा तथा अपराध के दर्ज होने से 30 दिन के भीतर अन्वेषण पूरा किया जाएगा तथा विचारण दिन प्रति दिन विक्रम रूप से 1 वर्ष अधिकतम तथा कारण अभिलिखित करते हुए 1 वर्ष 6 माह में पूरा किया जाएगा। श्री अमित जिंदल ने आगे बताया कि धारा 3 ख के अनुसारजिस व्यक्ति के विरुद्ध हिंसा की गई है उसके द्वारा न्यायालय की अनुमति से अपराध का शमन अर्थात राजीनामा किया जा सकेगा। श्री जिंदल ने यह भी बताया कि साक्ष्य से संबंधित प्रावधान इस अध्यादेश में कड़े किए गए हैं। धारा 3 ग में अभियुक्त द्वारा अपराध किये जाने की उप धारणा तथा धारा 3 घ में अभियुक्त की अपराध करने की मानसिक दशा के बारे में उप धारा का प्रावधान है। श्री जिंदल ने यह भी बताया कि वर्तमान अध्यादेश में प्रति कर संबंधित व्यवस्था भी की गई है धारा 3 ड में यह व्यवस्था है कि दोषी व्यक्ति आहत स्वास्थ्य सेवा प्रदाता को प्रति कर का भुगतान करेगा तथा संपत्ति को नुकसान करने के कारण संपत्ति के बाजार मूल्य के 2 गुना राशि के बराबर प्रति कर देगा जो कि भू राजस्व की बकाया की वसूली का जो तरीका का उसी अनुसार वसूली योग्य होगा।








Advertisement

Samvad Advertisement
× Popup Image


Trending News