जशपुर मुनादी।
बात कल यानी रविवार की है, पहाड़ी कोरवाओं के पास जब जीवन चलाने वाले निवालों दानों का लॉकडाउन में मोहताज होना पड़ा कहें तो समस्या खड़ी हो गई तो, उन्होंने सीधे जशपुर प्रबल प्रताप सिंह जूदेव को सूचना प्रेषित की, कहा कुछ मदद हो तो कीजिये। ये घटना घटी तो प्रबल ने भी सीधे इन गांवों की ओर रुख किया जो बादलखोल अभ्यारण्य के अंदर सुदूर पंचायत कलिया के बनखेता, और सिहारडांड़ पहुंचे, जहां उन्होंने अपने साथ लाये चावल दाल सब्जी मास्क और साबुन अपने ईस्टजन पहाड़ी कोरवाओं को सौंपा, वहीं उनको उनके परिवार और क्षेत्र को covid 19 के प्रकोप से बचने की सलाह के साथ शुभकामनाये दी कि हम सब क्षेत्रवासियों के सतर्कता और सूझ बूझ से हम अपने परिवार को इस वैश्विक महामारी से बचाये हुए हैं।

पर दानो निवालों की बात जब खत्म हुई थी तो दो अदद बून्द साफ पानी के लिए सिहारडांड़ के कोरवाओं ने जो गाथा सुनाई, उसे सुनकर प्रबल भी आवाक थे कहा देखिये साहव इस गांव में इतने पहाड़ी कोरवा है , सरकारें आती है जाती है, चेहरे बदले पर हमारा कुछ नहीं हुआ, पंच बदलते हैं सरपंच भी बदल जाते हैं पर आज तक हम पहाड़ी कोरवाओं की बस्ती में एक हैण्डपम्प या ढोड़ी तक कि सुविधा मुहैया नहीं है,
देखिये हम इतने पहाड़ी कोरवा हैं पर जब भी हमारे लिए पानी की सुविधा मुहैया कराने के लिए योजना आती है तो कह दिया जाता है कि यहां कोई पहाड़ी कोरवा ही नहीं रहता है, इन सब बातों को लेकर उन्होंने शासन प्रशासन और चमचमाती वाहनों में प्रतिनिधि बने फिरते लोगों की धज्जियां उड़ा दी। भाषा में उद्वेग इतना था कि इन लोगों को लेकर शासन के हर दावे कागज के पुलिंदे जैसे फर-फर कर आसमान में उड़ रहे हों। हालांकि प्रबल आये थे तो उन्होंने शासन प्रशासन को इनकी सुध लेने की बात कही और कहा जिम्मा हमारा यहां बोरिंग खुदेगा, पानी की समस्या खत्म होगी। इस समस्या के निदान पर कल ही से काम करवाने की कोशिश शुरू होगा।
पर यह बात भी सही है यहां पीढियां जब बीत गई और जब चुआं के पानी के अलावा कभी हैण्डपम्प का पानी नहीं मिला तो संघर्ष की गाथा है, अगर आक्रोश है तो इसका मतलब है यहां कोई भी निर्दोष नहीं है।

