ऑनलाइन फार्मेसी और कॉर्पोरेट नीति के खिलाफ 20 मई को देशव्यापी बंद, दवा व्यापारियों ने सरकार को चेताया, पढ़िए पूरी खबर

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May 16, 2026



ऑनलाइन फार्मेसी और कॉर्पोरेट नीति के खिलाफ 20 मई को देशव्यापी बंद, दवा व्यापारियों ने सरकार को चेताया, पढ़िए पूरी खबर

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सूरजपुर मुनादी।। देशभर के दवा व्यापारियों की शीर्ष संस्था All India Organisation of Chemists and Druggists के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर आगामी 20 मई 2026 को एक दिवसीय देशव्यापी बंद आयोजित किया जाएगा। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ राज्य इकाई के निर्देशानुसार सूरजपुर औषधि विक्रेता संघ के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन और ड्रग विभाग को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए अपनी लंबित मांगों पर त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है।


सूरजपुर औषधि विक्रेता संघ के अध्यक्ष विनोद अग्रवाल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने एडिशनल ड्रग कंट्रोलर को ज्ञापन सौंपकर कहा कि लंबे समय से दवा व्यापार और जनस्वास्थ्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सरकार द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। संघ का कहना है कि देशभर के 12.40 लाख से अधिक केमिस्टों और उनसे जुड़े लगभग 4 से 5 करोड़ आश्रितों की आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है।


वहीं क्षेत्र के प्रतिष्ठित दवा कारोबारी Majahir Ahmad ने 20 मई के प्रस्तावित देशव्यापी महाबंद को पूरी तरह सफल बनाने की अपील करते हुए कहा कि यह केवल व्यापारियों का आंदोलन नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और पारंपरिक औषधि वितरण व्यवस्था को बचाने की लड़ाई है। उन्होंने सभी दवा व्यापारियों से एकजुट होकर आंदोलन में भाग लेने का आह्वान किया।



ई-फार्मेसी और कॉर्पोरेट प्राइसिंग पर मुख्य आपत्ति 

दवा विक्रेताओं ने मांग की है कि अवैध ई-फार्मेसियों पर तत्काल रोक लगाई जाए और 28 अगस्त 2018 को जारी अधिसूचना GSR 817(E) को वापस लिया जाए। संघ का आरोप है कि ऑनलाइन दवा कंपनियों और बड़े कॉर्पोरेट समूहों द्वारा अपनाई जा रही आक्रामक मूल्य निर्धारण नीति छोटे और पारंपरिक दवा व्यवसायियों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।


इसके अलावा कोविड-19 महामारी के दौरान आपातकालीन परिस्थितियों में जारी 26 मार्च 2020 की अधिसूचना GSR 220(E) को भी वापस लेने की मांग की गई है। व्यापारियों का कहना है कि महामारी समाप्त हो चुकी है, लेकिन इन प्रावधानों का दुरुपयोग अब भी जारी है। 


“दवा कोई सामान्य वस्तु नहीं” 

ज्ञापन में बेहद गंभीर चिंता जताते हुए कहा गया कि दवा कोई सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं, बल्कि सीधे तौर पर मरीज की सुरक्षा और जीवन से जुड़ा विषय है। संघ के अनुसार अनियंत्रित ऑनलाइन दवा बिक्री के कारण कई गंभीर खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं।


संघ ने जिन प्रमुख खतरों का उल्लेख किया है, उनमें— 

बिना वैध पर्ची के दवाओं की बिक्री  

एक ही मेडिकल पर्चे का बार-बार उपयोग 

एंटीबायोटिक्स और नशीली दवाओं की आसान उपलब्धता 

फर्जी और असत्यापित पर्चों का उपयोग   

योग्य फार्मासिस्ट और मरीज के बीच संवाद का अभाव 

कमजोर नियामक नियंत्रण 

नकली और गलत दवाओं का खतरा 

तथा एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस का बढ़ता जोखिम शामिल है।  

संघ का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इसका सीधा असर आम जनता के स्वास्थ्य पर पड़ेगा।



सरकार से हस्तक्षेप की मांग 

सूरजपुर केमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन ने राज्य सरकार और भारत सरकार से मांग की है कि जनस्वास्थ्य और लाखों लोगों की आजीविका को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सुधारात्मक कदम तत्काल उठाए जाएं। साथ ही प्रेडेटरी प्राइसिंग पर रोक लगाकर निष्पक्ष व्यापार नीति लागू करने की भी मांग की गई है।


संघ ने स्पष्ट किया कि वर्तमान व्यवस्था में योग्य चिकित्सक और पंजीकृत फार्मासिस्ट की निगरानी में मरीज तक सही दवा पहुंचती है और इस प्रणाली को कमजोर करना जनहित के खिलाफ होगा। 

20 मई को प्रस्तावित देशव्यापी बंद को लेकर दवा व्यापारियों में व्यापक तैयारी और सक्रियता देखी जा रही है।


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