"घूमते सियासत की मूनादी"।। कैमरे के पीछे राजनीति मुस्कुरा रही है ,सोशल मीडिया अभी भी सोंच रहा है और जनता कह रही है ""भाई कुनकुरी में तो कहानी ही कुछ और चल रही है।
तो दोस्तो कुनकुरी में खुल गई है मोहब्बत की दूकान ।जी हाँ ,वही भाजपा जिसे लेकर सोशल मीडिया पर लोग अक्सर हिन्दू-मुस्लिम राजनीति की बहस करते हैं अब उसी भाजपा के नेताओ में मुस्लिम प्रेम देखने को मिल रहा है।भाजपा नेता मोहर्रम के जुलूस में मुस्लिम भाईयों को शर्बत और जलपान कराते नज़र आये ।
अब जनता कन्फ्यूज़ है... विरोधी हैरान हैं... और समर्थक गूगल पर सर्च कर रहे हैं—"ये अपडेट कब आया?कहते हैं राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता लेकिन कुनकुरी वालों ने तो यह बात लाइव दिखा दी।
मोहर्रम का जुलूस निकला भाजपा नेताओं ने रास्ता रोका लोग समझे शायद अब भाषण होगा लेकिन यहाँ तो शरबत निकला कोल्ड ड्रिंक निकली और मुस्कुराहटें भी फ्री में बाँटी गईं।
सबसे मजेदार बात ये कि
जगह भी ऐसी चुनी गई कि सोशल मीडिया वालों के मोबाइल अपने-आप रिकॉर्डिंग मोड में चले गए।स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की प्रतिमा के सामने मुस्लिम समाज का स्वागत हुआ ।
अब फेसबुक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अलग-अलग थ्योरी बना रहे हैं।कोई कह रहा है—भाई... ये नया संस्करण है ,
कोई बोला—"लगता है कुनकुरी में मोहब्बत का पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो गया है ,तो किसी ने कमेंट किया—"सिस्टम हैंग हो गया है अपडेट इंस्टॉल हो रहा है।उधर कुछ लोग पूछ रहे हैं...
ये वही भाजपा है या फिर किसी ने पार्टी का सॉफ्टवेयर अपग्रेड कर दिया है?
लेकिन एक बात तो तय हैअगर राजनीति में शरबत की एक गिलास से बहस थोड़ी कम हो जाए और स्वागत की एक मुस्कान से तनाव थोड़ा घट जाए तो नुकसान किसी का नहीं, फायदा समाज का ही होगा।
फिलहाल कुनकुरी की "मोहब्बत की दुकान" पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है अब देखना ये है कि यह ऑफर सिर्फ मोहर्रम स्पेशल था या आगे भी भाईचारे की यह मिठास ऐसे ही परोसी जाती रहेगी।