जशपुर मुनादी ।।चुनावी वर्ष के शुरुआत से ही भावी उम्मीदवारों के रुझान सामने आने लगे है। भावी उम्मीदवारों का रुझान आने शुरू होने से ज्यादा अहम बात यह है कि इस बार यहां भाजपा से चुनाव लड़ने वाले भावी उम्मीदवारों को लेकर नया समीकरण तैयार होना शुरू हो गया है। जिले के सबसे हॉट सीट और प्रदेश भर में सबसे ज्यादा पोलराइज सीट माने जाने वाले विधानसभा कुनकुरी से जो रुझान सामने आ रहे हैं वो हर बार से काफी अलग और चौकाने वाले हैं।
अंदरखाने की खबर यह है कि इस बार भाजपा से चुनाव लड़ने वाले दावेदारों की एक बड़ी फेहरिस्त तैयार हो रही है और इस फेहरिस्त में खड़े कुछ ऐसे लोग है जो गैर हिन्दू हैं । बताया जा रहा है कि इस बार ईसाई कम्यूनिटी से जुड़े नए चेहरे भी भाजपा से चुनाव लड़ने की मंशा रख रहे है। इस कम्यूनिटी के एक कांग्रेस नेता को लेकर कुछ दिनों से चर्चा हो रही है ये भाजपा की शरण में जा चुके हैं । भाजपा नेताओं से लगातार संपर्क कर रहे इन कांग्रेसी नेता को लेकर अंदर ही अंदर चुनाव लड़ने की भी चर्चा हो रही है ।
दूसरी ओर इसी विधानसभा में एक पूर्व महिला आईएएस भी चुनाव लड़ने की तैयारी में है ।हांलाकि इनके साथ ऐसा है कि इनके ऊपर किसी भी पार्टी का लेबल नहीं लगा है। एक साल पहले कमिश्नर के पद से रिटायर्ड इस महिला अफसर किस पार्टी से चुनाव लड़ने की इच्छुक है अभी तक यह तय नहीं हो पाया है और ना ही यह पता चल पाया है कि चुनाव की तैयारी करने का इशारा इन्हे किस पार्टी से मिला है लेकिन राजनीतिक सूत्रों के हवाले से जो खबर आ रही है वो ये कि इन महिला अफसर पर भाजपा ने निगाह रखना शुरू कर दिया है और ये भाजपा के रडार में हैं । सूत्र बताते हैं कि गैर हिन्दू विधायक को मात देने के लिए भाजपा इस बार कुछ तुफानी कर सकती है और महिला अफसर को लेकर आ रहे रुझान इसी तुफानी के संकेत हैं ।
भाजपा के जमीनी नेताओं का वैसे मानना है कि भाजपा इस बार किसी तरह का रिस्क नहीं उठाएगी और एक एक कदम फूंक फूंक कर चलेगी ।चाहे प्रदेश हो या कुनकुरी सभी जगह की सीट पर भाजपा के बड़े नेताओं की बारीक नजर है और यहां के हर उम्मीदवारों के लिए काफी मंथन करके ही फैसला लिया जाएगा ।वही कुछ जमीनी भाजपा नेताओं का यह भी कहना है कि इस बार भाजपा जिले में पुराने सभी दावेदारों के चेहरों को दरकिनार करके कुछ अलग चेहरा सामने लाने पर विचार कर रही है ।खाशकर कुनकुरी के लिए तो पार्टी को कुछ अलग करना ही पड़ेगा तभी यहां कुछ होने वाला है ।
वैसे स्वतंत्र राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि भाजपा को इस बार नया ढर्रा अपनाना होगा ।पुराने ढर्रे पर चलने से कुनकुरी सीट फिर से से भाजपा के हाथ से फिसल सकती है। आपको बता दें कि कुनकुरी सीट फिलहाल कांग्रेस की झोली में है । संसदीय सचिव यू डी मिंज यहां से विधायक है। बीते 2018 के चुनाव में इन्होंने इस सीट से तकरीबन साढ़े 4 हजार वोट से भाजपा के उम्मीदवार व पूर्व संसदीय सचिव भरत साय को हराया था ।कहा जाता है कि 2018 में ही जमीनी भाजपा नेताओं ने पार्टी के आला नेताओं को नए फार्मूले पर चुनाव लड़ने का सलाह दिया था लेकिन पार्टी उसी पुराने ढर्रे पर चली नतीजतन 35 साल बाद भाजपा को यहां हार का सामना करना पड़ा । जमीन से जुड़े भाजपा कार्यकर्ता और संघ के लोग नया चेहरा उतारने की जिद्द पर अड़े थे लेकिन पार्टी अपनी जिद्द पर अड़ी रही ।पार्टी कुनकुरी से 2 बार के विधायक रहे पूर्व संसदीय सचिव भरत साय को टिकट दे दिया और कार्यकर्ता एकबार्गी बागी हो गए ।फिर जो हुआ सबके सामने था । यही वजह है कि इस बार भाजपा यहां कुछ नया करने जा रही है जिसकी भनक लगते ही भाजपा में नए दावेदारों की लाईन लगनी शुरू हो गई है । दावेदारों की लाईन में ईसाई कम्युनिटी के लोग भी शामिल हैं । इन्हे ऐसा लगना शुरू हो गया है कि भाजपा इस बार इनकी कम्यूनिटी के लोगो को भी मौका दे सकती है ।बताया तो यहां तक जा रहा है कि पूर्व महिला आई ए एस को लेकर भाजपा में भीतर ही भीतर विचार मंथन शुरू हो गया है ।
हालाकि कुछ जानकारों का कहना है कि पूर्व महिला IAS चुकी ईसाई समुदाय से है इसलिए कांग्रेस पार्टी भी इनको लेकर उतना ही सीरियस है ।कांग्रेस के भीतर इन दिनों परफार्मेंस और विधायको के रिपोर्ट कार्ड को लेकर काफी जोरो से चर्चा शुरू हो गई है।प्रदेश के सीएम सहित कांग्रेस के कई बड़े नेताओं के इस बावत कई बार बड़े बयान आ चुके हैं।सीएम ने साफ साफ कह दिया है कि जिन विधायको के परफारमेंस सही नहीं है उनका फैसला पार्टी ही करेगी ।याने उन्होंने ढके छिपे शब्दो में यह क्लीयर कर दिया है कि खराब परफार्मेंस वाले विधायको का वो कुछ नहीं कर सकते । उधर 30 प्रतिशत विधायको के रिपोर्ट कार्ड खराब होने की भी अंदरूनी खबर आ रही है ऐसे में कोई बड़ी बात नहीं कि कांग्रेस पार्टी ऐन वक्त पर कुछ भी फैसला कर सकती है ।इस लिहाज से राजनीतिक तौर पर संवेदनशील सीटो के लिए दूसरे विकल्प को तैयार रखा जा रहा है । पूर्व महिला आईएएस भी उसी विकल्प का हिस्सा हो सकती है ।