बिलासपुर मुनादी।। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 116 करोड़ रुपए से बनने वाली जेल के लिए टेंडर को पुनजीर्वित करने के मामले में ईई लोक निर्माण विभाग के डिवीजन-1 के कार्यपालन अभियंता बीएल कापसे को दोषी पाया गया है। इसके बाद राज्य सरकार ने कार्रवाई करते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया है। वहीं, मां भगवती कंस्ट्रक्शन का पंजीयन भी पांच साल के लिए निरस्त कर दिया गया है।
इसके अलावा मंत्रालय में ऐसे और मामलों की जांच शुरू कर दी है। हाल ही में दिए गए सभी टेंडर में ठेकेदारों द्वारा लगाए गए दस्तावेजों का एक बार फिर सत्यापन किया जा रहा है। कूटरचित दस्तावेज वाले टेंडर निरस्त किए जाएंगे, साथ ही जिस अफसर की संलप्तिता मिलेगी उन पर भी कार्रवाई होगी। इस मामले में पीडब्ल्यूडी विभाग के सचिव आलोक कटियार ने बताया कि कंपनी ने भी अलॉटमेंट के लिए विभाग को पत्र लिखा था, जिसे यह कहते हुए नामंजूर कर दिया गया है कि पूर्व में ही एग्रीमेंट निरस्त होने के कारण अलॉटमेंट देने का सवाल ही नहीं उठता।
गौरतलब है कि मां भगवती कंस्ट्रक्शन कंपनी ने फर्जी दस्तावेज के जरिए बैमा में 116 करोड़ रुपए से बनने वाली केंद्रीय जेल की बिल्डिंग के निर्माण, पानी सप्लाई, सेनेटरी फिटिंग का ठेका लिया था। कंपनी ने यह टेंडर लेने के लिए जबलपुर में एक स्कूल को बनाने का दस्तावेज दिया। लोक निर्माण विभाग के अफसरों ने बगैर छानबीन किए ही ठेका दे दिया। बाद में छानबीन करने पर पता चला कि जबलपुर के मंगेली में श्रमोदय आवासीय विद्यालय का निर्माण मेसर्स सीएमएम इंफ्रा प्रोजेक्ट लिमिटेड इंदौर ने किया है। इस काम के लिए 47.43 करोड़ रुपए में एग्रीमेंट हुआ था, 25 मई 2021 को काम पूरा हुआ। छत्तीसगढ़ की मां भगवती कंस्ट्रक्शन ने इस काम को अपना बताकर और फर्जी दस्तावेज तैयार कर काम लिया था।