जशपुर मुनादी ।। “जिस भवन में कानून का पहरा होना है… अगर उसकी नींव ही भ्रष्टाचार पर रख दी जाए… तो जनता आखिर भरोसा किस पर करेगी…?”
ये तस्वीरें किसी खंडहर की नहीं हैं ये तस्वीरें हैं लाखों की लागत से बन रहे तपकरा के नए थाना भवन की वही थाना जहाँ से अपराधियों पर कार्रवाई होनी है।
लेकिन यहाँ तो खुद निर्माण में ही ‘अपराध’ की बू आने लगी है।दीवारों में दरार…ढलाई में बड़े-बड़े होल…छत से बाहर झाँकती सरिया…गड्ढों से भरा स्लैब…और ऐसा घटिया निर्माण कि पहली ही बारिश में छत झरने की तरह टपकने लगी।
तस्वीरें देखकर ऐसा लग रहा है मानो भवन का निर्माण नहीं…
“भ्रष्टाचार की ढलाई” की गई हो।मामला तब गरमाया जब मूनादी चौपाल ने इस पूरे खेल को उजागर किया।वीडियो वायरल हुआ…और फिर शुरू हुई आनन-फानन में ‘लीपा-पोती’।मजदूर बुलाए गए…सीमेंट पोता गया…
दरारों को ढकने की कोशिश हुई…लेकिन कहते हैं ना…
सच पर सीमेंट की परत नहीं चढ़ती।
सवाल ये है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही हुई कैसे?
क्या निर्माण एजेंसी सो रही थी?
क्या इंजीनियरों ने आँख बंद कर रखी थी?
या फिर सबकुछ देखकर भी “सब ठीक है” का खेल खेला जा रहा था?जानकारी ये भी सामने आई है कि भवन का निर्माण किसी "पेटी ठेकेदार" के जरिए कराया जा रहा है।
अपुष्ट जानकारी के मुताबिक इस भवन की लागत करीब 40 लाख रुपए बताई जा रही है।
अब इस मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है।
मूनादी चौपाल में वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस नेता मौके पर पहुंचे उन्होंने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया और खुलकर आरोप लगाया कि यह भवन नहीं “भ्रष्टाचार का स्मारक” तैयार किया जा रहा है।
हैरानी की बात ये है कि मामला कई दिनों से सुर्खियों में है सोशल मीडिया में वीडियो वायरल हैं जनता सवाल पूछ रही है लेकिन अब तक न जांच के आदेश न कार्रवाई न किसी जिम्मेदार अधिकारी का बयान।
अब सवाल बहुत सीधे हैं
क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी…?
क्या घटिया निर्माण करने वालों पर कार्रवाई होगी…?
या फिर कुछ दिनों बाद सीमेंट की एक नई परत चढ़ाकर पूरा मामला दबा दिया जाएगा…?
और सबसे बड़ा सवाल…
जिस थाना भवन को कानून का प्रतीक बनना था क्या वो भ्रष्टाचार का स्मारक बनकर रह जाएगा…?