जशपुर मूनादी ।। अगर एक यूनिट खून के लिए भी कीमत तय होने लगे, अगर ब्लड डोनेट करने आए डोनर से ही कथित तौर पर पैसे मांगे जाने लगें तो सोचिए गरीब मरीजों का क्या हाल होता होगा? जशपुर से एक ऐसा शिकायत पत्र सामने आया है जिसने सरकारी ब्लड बैंक की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खून जिसे जीवन बचाने का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता है। लेकिन अगर उसी खून के बदले कथित तौर पर वसूली होने लगे, तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं बल्कि इंसानियत पर भी सवाल है।
जशपुर कलेक्टर को सौंपे गए एक शिकायत पत्र में एक नियमित ब्लड डोनर राम साहू ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
शिकायत के अनुसार पिछले पांच वर्षों से वे जरूरतमंद मरीजों के लिए निशुल्क रक्तदान करते आ रहे हैं। लेकिन बीते दो महीनों से उनके अनुसार ब्लड बैंक में डोनर को अलग-अलग बहाने बनाकर रिजेक्ट किया जाता है।सबसे गंभीर आरोप यह है कि काउंसिलिंग के नाम पर कथित तौर पर एक हजार रुपये की मांग की जाती है। शिकायतकर्ता का दावा है कि पैसे नहीं देने पर ब्लड डोनेट करने से मना कर दिया जाता है।इतना ही नहीं, शिकायत में यह भी कहा गया है कि कथित लेन-देन ब्लड बैंक के अंदर नहीं बल्कि पीछे की गली में कराया जाता है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की सीसीटीवी जांच कराने की भी मांग की है।
राम साहू का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने इस मामले की शिकायत प्रभारी डॉक्टर से की तो कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अब इस पूरे मामले की शिकायत सीधे जशपुर कलेक्टर से की गई है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है
क्या सचमुच ब्लड बैंक में पैसे लेकर रक्तदान कराया जा रहा है?क्या जरूरतमंद मरीजों और डोनरों से अवैध वसूली हो रही है?या फिर शिकायत में लगाए गए आरोप जांच के बाद गलत साबित होंगे?
इन सभी सवालों का जवाब प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल, इस शिकायत ने जशपुर के स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।