जशपुर मुनादी।। रावण को वैसे कहें तो दशानन कहा जाता है, इसका मतलब यह है कि जिसके दस सिर हों, मगर जब आपको रावण के दस सर के जगह नौ सर ही देखने को मिले तो क्या कहेंगे नवां नन !
जिले के बगीचा के दशहरा मैदान में भी कुछ ऐसा ही हुआ जिसमें रावण के नौ सर ही थे, मुख्य अतिथि भी आये, और नौ सर वाले रावण को ही आग जलाकर चलते बने।
कुछ लोग यह पता लगाने की कोशिश कर रहे थे कि आखिर यह चमत्कार हुआ कैसे ? रावण का दसवां सर कहाँ है, ये तकनीकी त्रुटि थी या कुछ और ? जहां दशानन की जगह नवाननं का दहन किया गया। कुछ लोगों का कहना है कि रावण का दसवां सर चोर ले गए! कुछ ने कहा कलयुग है इसलिए रावण के नौ सर ही हैं। वो बात अलग है कि त्रेतायुग के रावण के दस सिर थे।
हालांकि दशहरा मैदान से लोग अपने घरों तक इस बात पर लगातार चर्चा करते रहे, और इस मिस्ट्री को अब तक नही सुलझा पा रहे कि बगीचा के इस रावण का दसवां सिर आखिर गया कहाँ.? आयोजको के घर मे या संयोजको के मन मे! या वाकई चोर चुरा ले गए, या ये कलयुग है ऐसा होता रहता है।