.....अंततः पूरे ताम झाम से नगर में निकला ताजिया , इस बात पर उपजा था , फिर इन्होंने दी "गारंटी" और फिर .....पढिये कुनकुरी में क्या हुआ जब ....

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July 17, 2024



.....अंततः पूरे ताम झाम से नगर में निकला ताजिया , इस बात पर उपजा था , फिर इन्होंने दी "गारंटी" और फिर .....पढिये कुनकुरी में क्या हुआ जब ....

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जशपुर मुनादी ।। काफी विवाद के बाद अंततः जिले के कुनकुरी में मोहर्रम का ताजिया परम्परागत तरीके निकल ही गया । वही ताजिया ,और पुराने रुट चार्ट पर ही ताजिया निकाला गया । 

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    आपको बता दें कि मोहर्रम का ताजिया निकालने को ले

कर कुनकुरी में मंगलवार से ही विवाद की स्थिति निर्मित हो रही थी और बुधवार को मोहर्रम के दिन सोशल मीडिया में यह बात जोर से वायरल होने लगी कि मोहर्रम का जुलूस इस बार कुनकुरी  में नहीं निकल रहा । न ताजिया निकलेगा,न जुलूस होगा बल्कि लोग अपने अपने घरों में फातिया कर के मोहर्रम का रस्म निभा लेंगे ।सोशल मीडिया में इस मामले को सामने आने के बाद लोगो के रिएक्शन भी आने शुरू हो गए लेकिन इससे पहले कि बात आगे बढ़ती मुस्लिम समाज ने मोहर्रम का जुलूस निकालकर सोशल मीडिया की भ्रांति को दूर कर दिया । 

     जानकारी के मुताबिक जुलूस के रूट चार्ट को लेकर विबाद की स्थिति निर्मित हुई थी । रथयात्रा और मोहर्रम एक साथ होने के कारण प्रशासन द्वारा कुछ बिंदुओं पर शर्त रखा गया था जो मुस्लिम समाज के एक धड़े को गंवारा नहीं था  और इसलिये इस बार ताजिया नहीं निकलने का फैसला लिया लेकिन समाज के ही दूसरे धड़े को ताजिया नहीं निकलना मंजूर नहीं था ।

     मुस्लिम समाज और यूथ कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष  रूफी खान ने बताया कि जुलूस के

रुट में मंदिर है ।मंदिर प्रांगण के पास dj नहीं बजाने और हथियार का प्रदर्शन नहीं करने की शर्त प्रशासन द्वारा रखी गयी थी लेकिन इस शर्त पर समाज के कुछ लोग सहमत नहीं थे लेकिन मेरे द्वारा कुनकुरी एसडीएम को लिखित में आश्वश्त किया गया कि मंदिर परिसर के आस पास डीजे और धार्मिक प्रदर्शन नहीं किया जाएगा ।आपसी सद्भावना और शौहार्द को बनाये रखने की गारंटी दिए जाने के बाद निर्धारित समय से कुछ विलंब करके मोहर्रम का ताजिया और जुलूस निकाला गया ।सैंकड़ो लोग जुलूस में शामिल हुए ,नगर में पुराने रुट चार्ट और पुरानी परम्पराओं के साथ जुलूस निकाला गया ।

  इस मामले में एसपी शशिमोहन सिंह ने बताया कि कानून व्यवस्था ना बिगड़े यह सोचकर मंदिर परिसर के पास डीजे और हथियारों का प्रदर्शन करने मना किया गया था जिसे समाज के लोगो ने स्वीकार किया और नगर में पूर्ववत ताजिया निकाला गया । 


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   हांलाकि  समाज के लोगो द्वारा निकाले गए जुलूस में समाज के ही  कई लोग शामिल नहीं थे


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