रायगढ़ मुनादी।। हमारे देश से जाति है कि जाने का नाम नहीं ले रही। जाति के नाम पर अत्याचारों का सिलसिला जारी है। कभी घोड़ी चढ़ने पर, कभी पानी छूने पर तो कभी पढ़ने पर देश के कई हिस्सों में अनुसूचित जाति के लोगों को जान तक गंवानी पड़ी है। मामले में एक्शन लिया जाता है लेकिन एक्शन या सजा का कोई असर समाज पर नहीं होता दिखता। महापुरुषों के ज्ञान, संविधान की धाराएं जाति नामक कुरीति के आगे नतमस्तक है।
ताजा मामला रायगढ़ जिले के पुसौर थाना क्षेत्र का है। अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों ने पुसौर थाने में एक आवेदन दिया है कि रणभांठा गांव में नामयज्ञ सप्ताह मनाया जा रहा है। जहां यह आयोजन हो रहा है वहीं से अनुसूचित जाति के लोगों को आने जाने का रास्ता है लेकिन इस कार्यक्रम के शुरू होते ही उनके उस तरफ आने जाने पर रोक लगा दी जाती है। उस कार्यक्रम में इस समुदाय के जाने पर रोक लगा दी गई है। यही नहीं जब कलश यात्रा हो रही थी तब गांव के दूसरी जाति के युवतियों ने अपने अनुसूचित जाति की सहेली को कलश यात्रा में शामिल करने बुलाया था लेकिन उस बच्ची को आयोजकों ने यह कहकर वापस भेज दिया कि वह इसें भाग नहीं ले सकती।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने पुलिस को इस आशय की शिकायत भी की लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस मामले में पुसौर थाने के इंचार्ज मरकाम ने मुनादी को बताया कि शिकायत मिली है, कल जांच के लिए अधिकारी को भेजा जाएगा। यदि अपराध घटित होना पाया गया तो FIR भी दर्ज की जायेगी।
सोशल मीडिया में इस बाबत पोस्ट भी।लिखा जाना शुरू हो गया है। संजीव लहरे नमक यूजर ने लिखा है कि जाति है कि जाती नहीं। सतनामी समाज के 11 वर्षीय बेटी को नमयज्ञ सप्ताह के कलश यात्रा में शामिल होने।से रोका गया। इस पर कई लोग प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं।