Munaadi Breaking jashpur भाजपा नेता का पैर पकड़ने वाले कांग्रेसी नेता का नाम उजागर करेंगे विनयशील, कहा-प्रेस कांफ्रेंस करके खोलूंगा पोल, कहीं के नही ...पढिये पूरी खबर

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April 18, 2026



Munaadi Breaking jashpur भाजपा नेता का पैर पकड़ने वाले कांग्रेसी नेता का नाम उजागर करेंगे विनयशील, कहा-प्रेस कांफ्रेंस करके खोलूंगा पोल, कहीं के नही ...पढिये पूरी खबर

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जशपुर मुनादी।। जिले की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नगर पंचायत कुनकुरी के अध्यक्ष विनयशील ने जिला कांग्रेस के सोशल मीडिया ग्रुप में ऐसा पोस्ट डाल दिया है, जिसने पार्टी के भीतर ही भूचाल ला दिया है।

मामला शुरू हुआ एक साधारण तारीफ से—ईसाई आदिवासियों के मुद्दे पर आक्रामक तरीके से आवाज उठाने को लेकर एक कार्यकर्ता ने विनयशील की सराहना कर दी। लेकिन यह तारीफ जिला कांग्रेस के एक महामंत्री को रास नहीं आई। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा—

“आगे की कुर्सी नहीं मिलने से कुछ लोग नाराज हो जाते हैं…”

बस फिर क्या था…

इस एक लाइन ने अंदर छुपे गुस्से को बाहर ला दिया।


महामंत्री के इस तंज के जवाब में विनयशील ने सीधा हमला बोलते हुए दावा किया कि—

कांग्रेस का ही एक “बड़ा नेता” पार्टी को कमजोर करने के लिए भाजपा से सांठगांठ कर चुका है।

इतना ही नहीं, उन्होंने जल्द ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उस नेता का “पोल खोलने” की धमकी भी दे दी।


यह बता दें कि कुछ दिन पहले विनयशील ने फेसबुक पोस्ट कर खुलाशा किया था कि काँग्रेस का एक बड़ा नेता भाजपा जिलाध्यक्ष का पैर पकड़कर आया है वो भी एक मामले को सलटाने के लिए " इस पोस्ट के बाद खलबली मच गई थी । लेकिन आज फिर से पैर पकड़ने वाला मुद्दा उभर कर सामने आ गया और इस बार तो विनयशील ने सीधे धमकी भी दे डाली वो भी अपने ही पार्टी के महामंत्री को ।

यह बयान सिर्फ एक आरोप नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर “विश्वास संकट” का सार्वजनिक प्रदर्शन है


इस पूरे घटनाक्रम को तीन बड़े राजनीतिक एंगल से समझा जा सकता है:


विनयशील का “भूपेश गुट” से जुड़ाव और जिला नेतृत्व से टकराव अब खुलकर सामने आ गया है।

यह साफ संकेत है कि संगठन के भीतर दो लाइनें खिंच चुकी हैं।


ईसाई आदिवासी मुद्दा सिर्फ सामाजिक नहीं, बल्कि राजनीतिक “वोट नैरेटिव” बन चुका है।

जो नेता इस मुद्दे को आक्रामक तरीके से उठा रहा है, वही चर्चा में है—और यही बात अंदरूनी तौर पर नेताओं को चुभ रही है।


विनयशील को पार्टी कार्यक्रमों से दूर रखना, मंच पर जगह न देना—

यह दिखाता है कि संगठन “डिसिप्लिन” के नाम पर मजबूत स्थानीय चेहरों को कंट्रोल करना चाहता है।


आखिरी में सबसे बड़ा सवाल ये कि क्या कांग्रेस के अंदर “बीजेपी कनेक्शन” का आरोप सच है या सिर्फ गुटीय राजनीति का हथियार?

क्या प्रेस कॉन्फ्रेंस में सचमुच कोई बड़ा खुलासा होगा या यह सिर्फ दबाव की रणनीति है?


विनयशील का यह कदम सिर्फ एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक “राजनीतिक संदेश” है—

“अगर मुझे हाशिए पर रखा गया, तो मैं खेल बदल दूंगा…”


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