रायगढ़ मुनादी।। केलो परियोजना में नहर बनाने के दौरान नेतनागर गांव के लोगों ने नहर निर्माण का विरोध कर दिया है, इसके बाद राजनीति भी तेज हो गई है। सोमवार को ग्रामीणों ने एक मीटिंग भी बुलाई थी जिसमें कई तकनीकि सवाल उठाए गए थे जिसमें सबसे अहम सवाल यह था कि इस नहर में पानी आ ही नहीं सकता। इन्हीं सवालों के जवाब लेने मुनादी ने बात की केलो परियोजना के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर पीआर फुलेकर से।
उनसे बात करने पर कई बातें सामने आई और उनके द्वारा कई आशंका भी दूर की गई। किसानों की सबसे बड़ी आशंका यह है कि टेल एरिया होने और ऊंचाई में स्थित होने के कारण यहां पानी पहुंचने को लेकर शंका है। इस सवाल पर फूलेकर ने कहा कि किसानों की इस बात का कोई आधार नहीं है। क्योंकि केलो परियोजना का डैम काफी ऊंचाई पर बना है। यहां से सक्ति जिले तक पानी पहुंचेगा। नेतनागर तो वैसे भी केलो परियोजना से करीब है, और नेतनागर से ज्यादा ऊंचाई में स्थित पास के गांव झलमला में नहर का काम पूरा हो चुका और वहां भरपूर पानी पहुंच भी रहा है। ऐसे में नेतनागर में पानी नही पहुंचने की आशंका निर्मूल है। कहा जा रहा है कि बांध की ऊंचाई पहले जो थी उससे 6 मीटर घटा दी गयी है जिसका असर पानी के सप्लाई पर पड़ेगा और यह भी कारण है कि नेतनागर तक पानी शायद न पहुंचे। इसको लेकर उन्होंने कहा कि परियोजना में पहले सिंचाई के साथ बिजली निर्माण करने का प्रस्ताव भी शामिल था। जिसके कारण डैम की ऊंचाई अधिक रखी गयी थी। किंतु बाद में बिजली उत्पादन के प्रपोजल को निरस्त कर दिया गया तो डैम की ऊंचाई भी नही बढ़ाई गयी क्योंकि इससे डूबान क्षेत्र भी बढ़ता जिसका कोई अर्थ नहीं था। प्रस्तावित नहरों में पानी सप्लाई करने के लिए डैम की वर्तमान ऊंचाई और स्टोरेज क्षमता पर्याप्त है।
उन्होंने केलो नहर के टेल एरिया को डिफाइन करते हुए कहा कि यह नहर का टेल एरिया इसलिए है क्योंकि इसके बाद ओडिसा है जहां पर हमे काम नहीं करना है। उन्होंने यह भी कहा कि नहर रेंगलपाली तक जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि न तो नेतनागर, डैम से ज्यादा ऊंचाई पर है न ही उतनी दूरी पर कि वहां तक पानी पहुंचने में कोई अवरोध आ सके। उन्होंने बताया कि नेतनागर, डैम के समुद्र तल की ऊंचाई की तुलना में 27 मीटर नीचे है। ऐसे में यह कहना कि पानी का फ्लो ग्रेविटी के विपरीत है, बिलकुल गलत धारणा है। नहर में पानी न पहुंचने की आशंका निराधार है।
उन्होंने मुनादी को यह भी बताया कि इस परियोजना में केंद्र और राज्य सरकार के 19 विभाग लगे हैं। सारे असेसमेंट किए जा चुके हैं। किसानों ने पहले खरीफ के साथ रबी फसल में पानी दिए जाने की बात लिखित में देने की मांग रखी थी। इस सवाल पौ उन्होंने कहा कि किसी भी डैम में बारिश का पानी स्टोर करके रखा जाता है ताकि जरूरत पड़ने पर उसका उपयोग किया जा सके। इसमें सिंचाई के साथ पेयजल और निस्तारी के लिए पानी दिया जाता है। कम बारिश की स्थिति में खरीफ फसलों के अंतिम चरण में अथवा जरूरत अनुसार पानी दिया जाता है। इसके अलावा डैम में गर्मी के मौसम में पेयजल और निस्तार के लिए पानी स्टोर कर के रखा जाता है। किसानों को सिंचाई के लिए कब और कितना पानी दिया जाना है ये फैसला तात्कालिक परिस्थितियों के आधार पर लिया जाता है। सभी बांध परियोजनाओं में इसी आधार पर कार्य होता है, ऐसे में किसानों को रबी फसल में सिंचाई के लिए पानी दिए जाने का लिखित आश्वासन देना हमारे लिए संभव नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि जमीन अधिग्रहण पूरा कर अवार्ड पारित कर दिया गया है। भू अर्जन अधिनियमों के तहत मुआवजे की रकम तय की गयी। किसानों को वितरण के लिए चेक तैयार कर उन्हे वितरित करने कैंप लगाए गए।अभी मुआवजे को लेकर जिन किसानों को असंतोष है उन्हें प्रशासन ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वे उचित फोरम में अपनी बात रख सकते हैं।
उन्होंने कहा कि केलो परियोजना में नहरों का काम पूरा करने प्रशासन द्वारा युद्धस्तर पर कार्य शुरू किया गया है। इस बहुउद्देशीय परियोजना का काम काफी लंबे अरसे से चल रहा है। जिसे पूरा करना बेहद जरूरी है ताकि जिन किसानों के लिए यह परियोजना तैयार की गई है उन्हे इसका लाभ मिल सके। इस परियोजना में अबतक 890 करोड़ की लागत आई है, 12 साल से अधिक का वक्त हो चुका है।
केलो परियोजना के तहत वितरक और लघु नहरों का काम फिर से शुरू किया गया। रायगढ़ के करीब नेतनागर में 1.6 किमी नहर का काम किया जाना बाकी है। जिससे यहां तथा आसपास के इलाके के करीब 860 हेक्टेयर में सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। लेकिन यहां काम शुरू करने पहुंचे ठेकेदार और उनके लोगों से अधिग्रहित जमीन के किसानों के बीच हुए विवाद के बाद काम रुक गया था। प्रशासन और पुलिस को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा। लेकिन किसान पानी और मुआवजे को मुद्दा बनाते हुए काम नहीं करने देने पर अड़े हुए हैं। इसको लेकर कलेक्टर, विधायक रायगढ़ और किसानों के बीच त्रिपक्षीय वार्ता हुई। वार्ता के बाद किसानों ने नहर के दूसरी छोर से काम करते आने पर नेतनागर में काम पूरा करवाने पर अपनी सहमति जताई थी। लेकिन दूसरे दिन किसान नहर बनने के बाद वहां पानी नही पहुंचने और आज के दर पर मुआवजे की बात को लेकर अड़ गए हैं। लेकिन जिस तकनीकि आशंका को आधार बनाया गया था इसका बिंदुवार जवाब केलो परियोजना के अधिकारी द्वारा दी गई है।