रायगढ़ मुनादी।। अब केलो नदी के प्रदूषण की हर घंटे जांच होने की व्यवस्था की गई है ताकि इसके अंदर के बैक्टीरिया और बीओडी और DOD का पता लगाई जा सके। कई बार सरकारी और गैर सरकारी जांचों में केलो के पानी को निस्तार के योग्य भी नहीं माना गया था हालांकि पर्यावरण विभाग इस पर चुप्पी साधे बैठा था। ऐसी जांच में प्रदेश के पांच नदियों को शामिल किया गया है।
केलो के अलावा अब प्रदेश की प्रमुख नदियां महानदी, शिवनाथ, खारुन, हसदेव में भी अब हर घंटे पानी की जांच की जाएगी। केलो नदी में दो प्वाइंट चिन्हित कर लिए गए हैं। केलो में भी दो जगह मेजरमेंट मशीन लगाई गई है। एक मरीन ड्राइव और दूसरा कया घाट। पानी में डिसाॅल्व ऑक्सीजन, बाॅयोलाॅजिकल ऑक्सीजन डिमांड या बीओडी और बैक्टीरिया के प्रकार का पता लगाने के लिए ये मशीनें लगाई गई है।
बताया गया है कि ये मशीनें हर घंटे में पानी का सैंपल लेकर जांच करके बता देंगी कि पानी में बीओडी और बैक्टीरिया की मात्रा कितनी है। इस आधार पर नदियों का डेटाबेस तैयार होगा। इस डाटा के आधार पर उनके पानी को साफ या शुद्ध करने की योजना पर काम किया जाएगा ताकि आम लोगों को शुद्ध और साफ पानी मिल सके। प्रदूषित पानी से होने वाली बीमारियों और नुकसान से इन्हें बचाया जा सके।
यह नेशनल वाटर क्वालिटी मानिटरिंग प्रोग्राम का हिस्सा है। केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड ने इसके लिए ही इन पांच नदियों को चुना है। चयन से पहले इन पांचों नदियों में बैक्टीरिया और गंदगी ज्यादा मिलने के कारण इन नदियों को राष्ट्रीय मानक में चौथी और पांचवी कैटेगरी में रखा गया है। इसके बाद ही इन नदियों को इस परियोजना में शामिल किया गया है।