रायगढ़ मुनादी।। प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा चुनाव के बाद अब नगर निगम चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। रायगढ़ में महापौर पद अनुसूचित जाति (महिला) के लिए सुरक्षित है लेकिन अब कहा जा रहा है कि इस बार यह अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित होगा जिसमे महिला या पुरुष कोई भी चुनाव लड़ सकता है। इस बार महापौर के लिए प्रत्यक्ष चुनाव होने की बात भी कही जा रही है। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा के अंदर महापौर पद के लिए दावेदारी की सुगबुगाहटें तेज हो गई है।
विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भरी मतों का अंतर जहां भाजपा को उत्साहित कर रही है वहीं कांग्रेस में भी महापौर पद के दावेदारों की लंबी कतार देखी जा सकती है। इनमें ज्यादातर पुरुष ही हैं। यदि रायगढ़ नगर नीमा से महिलाओं का आरक्षण खत्म हुआ तो भाजपा और कांग्रेस से कई नामचीन चेहरे महापौर पद की दावेदारी के लिए आगे आ सकते हैं। भाजपा में जहां प्रदीप श्रृंगी, राकेश रात्रे, रंजू संजय आदि का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है वहीं कांग्रेस से वर्तमान महापौर जानकी काटजू, नारायण घोरे, मुरारी भट्ट, लखेश्वर मिरी, मनोज सागर आदि के नाम सामने आ रहे हैं।
पूर्व महापौर जेठूराम मनहर द्वारा कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद पार्टी से उनकी दावेदारी तो समाप्त हो गई लेकिन वे लगातार सक्रिय हैं और जनसंपर्क कर रहे हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से भी वे लगातार अपने लोगों के संपर्क में हैं। चर्चा इस बात की भी है कि जेठूराम मनहर भाजपा के साथ भी जा सकते हैं। वहां से उन्हें टिकट यदि मिल जाती है तो भाजपा और जेठूराम मनहर दोनों के लिए बहुत मजबूत स्थिति होने की संभावना है। हालांकि इन बातों के अभी सिर्फ कयास ही लगाए जा सकते हैं जबतक कि कोई आधिकारिक घोषणा सामने न आ जाए।
महापौर जानकी काटजू इस पद के लिए स्वाभाविक उम्मीदवार हैं क्योंकि वे वर्तमान महापौर भी हैं और सक्रिय भी। हालांकि उनकी दावेदारी कितनी बड़ी है या वे दावेदारी करती हैं या नहीं यह भी अधिक क्लियर नहीं है लेकिन वर्तमान में महापौर होने के कारण उनकी दावेदारी की स्वाभाविक ही माना जाना चाहिए। जानकी काटजू सीधे चुनाव से महापौर नहीं बनीं बल्कि उनका चुनाव चुने हुए पार्षदों ने किया है इसलिए सीधे चुनाव में वो उतरने के लिए तैयार हैं या नहीं यह स्पष्ट भी नहीं है। उनके द्वारा खुलकर दावेदारी भी नहीं की गई हैं लेकिन वे लगातार सक्रिय भूमिका में हैं।
कांग्रेस के दूसरे दावेदारों में मुरारी भट्ट का नाम सामने आ रहा है। मुरारी भट्ट 1995 से लगातार पार्षद हैं। उन्होंने 1995 में पहली बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था और उसमें विजय हुए थे। बाद में मुरारी भट्ट कांग्रेस में शामिल हो गए थे। बुच में उन्होंने अपनी पत्नी को भी चुनाव लड़ाया और जितवाया। ऐसे में उन्होंने यदि दावेदारी की तो उनकी दावेदारी भी मजबूत हो सकती है। उनके पास नगर निगम में काम का अनुभव भी है।
कांग्रेस में इस बार नारायण घोरे ने पहली बार महापौर पद के लिए दावेदारी की है। इससे पहले नारायण नगर निगम में एल्डरमैन भी रह चुके हैं हालांकि इनका कार्यकाल काम दिनों के लिए ही रहा। नारायण 35 वर्षों से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। छात्र जीवन में NSUI के नगर अध्यक्ष,युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष और शहर कांग्रेस के महामंत्री रह चुके हैं। ये लगातार पार्टी के लिए काम करने वालों में सबसे निर्विवाद नेता हैं। इस बार नगर निगम चुनाव में इनकी दावेदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बार महापौर के लिए ओपन इलेक्शन होना है और चुनाव में लोग पहले की तरह महापौर और पार्षद के लिए वोट देंगे ऐसे में किसी भी प्रत्याशी के लिए उसकी लोकप्रियता या पार्टी के प्रतिबद्ध लोगों में स्वीकार्यता एक अहम बात होगी।
कांग्रेस से इसी तरह युवा चेहरा मनोज सागर का नाम भी दावेदारों की सूची सामने आने की संभावना है। मनोज पिछले 24 वर्षों से कांग्रेस के साथ राजनीति में सक्रिय हैं। शहर महामंत्री के रूप में नगेंद्र नेगी, जयंत ठेठवार, अनिल शुक्ला आदि के नेतृत्व में सेवा दे चुके हैं। 2018 में वे ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी बने थे। मनोज सागर हालांकि अधिकारी बनना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाएं भी दी लेकिन सफल नहीं हुए।
बताया जा रहा है कि नगर निगम और जिला पंचायत के चुनाव साथ साथ होने वाले हैं ऐसे में चुनाव जनवरी या फरवरी में करवाए जा सकते हैं। चुनाव की तैयारियां प्रशासनिक स्तर पर शुरू भी हो गई हैं ऐसे में दावेदारों ने भी अपने राजनीतिक प्रयास शुरू कर दिया है। भाजपा में भी दावेदारों की लंबी कतार है ऐसे में उनका विश्लेषण अगले एपिसोड में।