जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है जशपुर का छत्तीसगढ़िया ओलंपिक खिलाड़ी, मदद करने की बात दूर कोई फोन भी नहीं उठा रहा ,डेढ़ साल के बच्चे के साथ पति की देखभाल कर रही पत्नि ने कहा - पंचायत वाले तो .......

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November 02, 2022



जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है जशपुर का छत्तीसगढ़िया ओलंपिक खिलाड़ी, मदद करने की बात दूर कोई फोन भी नहीं उठा रहा ,डेढ़ साल के बच्चे के साथ पति की देखभाल कर रही पत्नि ने कहा - पंचायत वाले तो .......

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जशपुर मुनादी।।छत्तीसगढ़िया ओलंपिक में कबड्डी खेलने के दौरान गंभीर रूप से घायल युवक आज भी जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है।फरसाबहार ब्लॉक के जाम बहार निवासी समारु केरकेट्टा कई दिनों से रायगढ़ के जिंदल हॉस्पिटल में आईसीयू में भर्ती होकर जिंदगी की सांसे गिन रहा है ।इससे। भी बड़ी हैरानी वाली बात यह है कि छत्तीसगढ़िया ओलंपिक के आयोजकों,पंचायत वालों और अधिकारियों ने अब हाथ खड़े कर दिए है।कोई भी घायल युवक की मदद करने को तैयार नहीं है।घायल के बूढ़े पिता , पत्नि और उसके डेढ़ साल की एक बच्ची घायल की देख रेख करने अस्पताल में रह रहे हैं l 

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घायल युवक समारूं केरकेट्टा (28 वर्ष)की पत्नी रंगो केरकेट्टा ने हमे फोन पर बताया कि उसका पति आज तक ऑक्सीजन में है ।उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही है।वह बात चीत नहीं कर पा रहा है ।उसके स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है ।जिंदल अस्पताल में ईलाज चल रहा है l अबतक 60 हजार का बिल हो चुका है लेकिन 60 हजार कहां से लाए ? घायल का आयुष्मान कार्ड भी नहीं है। मदद के लिए खेल आयोजन समिति के पदाधिकारी विजेता को भी फोन लगाई और मदद मांगी लेकिन मदद तो मदद कोई उधारी भी देने को तैयार नहीं है।अब तो विजेता फोन भी नहीं उठाता।इसके बाद सरपंच को फोन लगाई और उन्हें पूरी बात बताते हुए मदद की गुहार लगाई  लेकिन सरपंच ने भी फोन उठाना बंद कर दिया । एक दिन सरपंच का फोन आया ।फोन पर ही सरपंच को बताई कि अस्पताल को 60 हजार देना है ।पैसे के अभाव में समारु का इलाज नहीं हो पा रहा है।यहां के डाक्टरों ने समारू को दूसरे अस्पताल ले जाने की सलाह दे चुके हैं लेकिन बिना 60 हजार अदा किए उसे इस अस्पताल से कैसे ले जाए? 



रंगो केरकेट्टा ने आगे  बताया कि उसे हिंदी बिलकुल नहीं आती ।वह सादरी और उड़िया जानती है ।उसके साथ रह रहे उसके ससुर को भी हिंदी नहीं आती ।इसलिए उसने सरपंच को फोन पर अस्पताल आने को कहा था ताकि डाक्टरों से कोई बात कर सके ।लेकिन किन्हीं के कानो में जू तक नहीं रेंग रही है ।कोई मदद नहीं कर रहा है।


आपको बता दें कि फरसाबहार ब्लॉक के ग्राम पंचायत सुंदरू छत्तीसगढ़िया ओलंपिक के क्रम में कबड्डी खेलने के दौरान समारू की सांस रुक गई थी और वह बेहोश हो गया था ।उसे बेहोशी की हालत में तपकरा सरकारी अस्पताल लाया गया ।यहां प्राथमिक इलाज के बाद डाक्टरों उसे रायगढ़ के लिए रेफर कर दिया ।डाक्टरों के मुताबिक उसके गर्दन के नीचे का हिस्सा डिसेक्टिव हो गया है जिसके चलते उसके गर्दन के नीचे का हिस्सा शिथिल हो हो गया है और ऊसे सांस लेने में दिक्कत हो रही है इन परिस्थितियों को देखते हुए उसे रायगढ़ जिंदल अस्पताल रेफर किया गया ।


घायल युवक के इलाज को लेकर जब फरसा बहार जनपद के सीईओ टैंगवार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि घायल के पास आयुष्मान कार्ड है और आयुष्मान कार्ड से उसका इलाज चल रहा है लेकिन मरीज की पत्नी का कहना है कि मरीज के नाम से आयुष्मान कार्ड है हीं नहीं ।


इस मामले में जब आज जनपद सीईओ फरसाबहार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनके द्वारा घायल को व्यक्तिगत तौर पर सहयोग किया गया था ।शासकीय तौर पर ईलाज या आर्थिक मदद का कोई प्रावधान नहीं होने के चलते आयुष्मान कार्ड के जरिए ही घायल का इलाज होना है ।घायल के नाम का आयुष्मान कार्ड नहीं है लेकिन उसकी पत्नी के नाम का आयुष्मान कार्ड है और उसका आयुष्मान कार्ड भी काम आ सकता है ।


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इस मामले में जिंदल फोर्टीज अस्पताल ने बताया कि मरीज का इलाज आयुष्मान कार्ड से किया जा रहा है, कुछ दवाइयां लेनी पड़ती है उसका बिल थोड़ा बहुत है लेकिन उससे कोई दिक्कत वाली बात नहीं है। चूंकि उसकी स्थिति ठीक नहीं है वह वेटिलेटर पर है इसलिए कही ले जाने की कोई बात नहीं कही गई है। फिलहाल उसका इलाज जारी है।


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