सियासत के घूमते हुए आईने की मुनादी ।।मातृसंस्था भारतीय जनता पार्टी को अलविदा कहकर कांग्रेस का दामन थामने वाले आदिवासी नेता नंदकुमारसाय को आखिरकार कैबिनेट मंत्री का दर्जा हासिल हो गया । साय के कांग्रेस में आने के कारण जो भी हो लेकिन चुनाव के ठीक कुछ माह पहले उन्हें सत्ता में शामिल किए जाने की कई वजहें हो सकती है ।
यह बात सच है कि साय के सियासी कद के अनुपात में औद्योगिक विकास निगम जैसे पद काफी बौने है लेकिन सियासत के खेल में साध्य को सामने रखा जाता है ।सियासत का मूलमंत्र भी यही है ।
दरअसल साय को सत्ता में शामिल करके कांग्रेस ने सरगुजा में आगामी जीत का समीकरण तैयार कर लिया है । शुरू से असंतुष्ट चल रहे प्रदेश के स्वास्थ मंत्री टी एस सिंहदेव को एकाएक डिप्टी सी एम बनाये जाने की घोषणा करके काँग्रेस ने सरगुजा में किला फतह करने का शंखनाद तो कर ही दिया था लेकिन ठीक उसके अगले दिन सरगुजा के पूर्व सांसद रहे नंदकुमारसाय साय को भी सत्ता में बड़ा ओहदा देकर सरगुजा को सेफ करने में कोई कसर नहीं छोड़ा ।
आपको बता दें कि पूर्व में आये अधिकांश चुनावी सर्वेक्षणों में कांग्रेस की स्थिति सरगुजा में चिंताजनक बताई गई ।कुछ सर्वेक्षणों में यो यहां रिपोर्टिंग हुई कि सरगुजा में कांग्रेस 2 या 3 सीट में ही सिमटने जा रहीहै । कांग्रेस के अंदरूनी सर्वेक्षणों में भी कुछ ऐसे ही रिपोर्ट आये ।हांलाकि फिलहाल सरगुजा के सभी 14 सीटों पर कांग्रेस काबिज है ।पिछले चुनाव में यहां से भाजपा का सूपड़ा साफ हो गया था । ऐसे में सरगुजा को सेफ रखना कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती है इसलिए कांग्रेस ने सबसे पहले सरगुजा को साधा और 2 बड़े फैलसे लिए ।पहला सिंहदेव को डिप्टी सीएम बनाकर और दूसरा नंदकुमारसाय को सत्ता में शामिल करके ।
आपको बता दें कि नंदकुमारसाय परिसीमन से पूर्व तपकरा विधानसभा से 3 बार विधायक चुने गए है।2004 में सरगुजा लोकसभा सीट से सांसद भी रह चुके हैं ।इसके अलावे इन्हें लगातार 2 बार राज्यसभा भेजा गया ।2014 में मोदी सरकार के गठन के बाद ये 5 वर्ष तक अनुसूचित जाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे ।इस तरफ साय का पॉलटिकल प्रोफ़ाइल काफी बड़ा है और कांग्रेस इस चुनाव में इन पर दांव खेलने में संकोच नहीं करेगी ।माना जा रहा है कि पार्टी इस बार इन्हें सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ा सकती है ताकि भाजपा के आदिवासी कार्ड का मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके ।
नंदकुमारसाय साय अभी की स्थिति में कांग्रेस के लिए एक ऐसा आदिवासी चेहरा हैं जिनके सहारे भाजपा के आदिवासी कार्ड को जवाब दिया जा सकता है ।हांलाकि कांग्रेस के पास अमरजीत भगत जैसे तेज तर्रार आदिवासी नेता भी है और वो भी सरगुजा से ही है लेकिन साय कांग्रेस के इकलौते सनातनी सोंच वाले आदिवासी नेता हैं जो भाजपा के नब्ज को तरीके से समझते हैं ।