जशपुर मुनादी।। छग सरकार द्वारा देशी व्यंजनों को बढ़ावा देने के लिए हर जिला मुख्यालयों में स्थापित किये गए गढ़कलेवा को लेकर जशपुर में सवाल उठने लगे है।आप सोंच रहे होंगे कि चूंकि गढ़कलेवा प्रदेश सरकार की सोंच है इसलिए विपक्षी पार्टी भाजपा ने सवाल उठाए होंगे लेकिन ऐसा नहीं है कुछ काँग्रेस के लोगो ने इसको लेकर सवाल खड़े किए हैं।
जिले के काँग्रेस आईटी सेल ने गुरुवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर गढ़कलेवा की ओर कलेक्टर का ध्यान आकृष्ट करते हुए ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में उन्होंने लिखा है कि छ0ग0 शासन के द्वारा छत्तीसगढ़ी एवं स्थानीय व्यजनों एवं खान-पान की पारम्परिक व सांस्कृतिक मेजबानी के विरासत को सहेजने एवं बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण उद्देश्य के अनुरूप प्रदेश के सभी जिलों में "गढ़कलेवा' की शुरूआत की गई है।जिसके तहत जिला जशपुर में भी कलेक्टोरेट परिसर गौरव पथ के पास गढ़कलेवा की स्थापना की गई है जिसका संचालन वर्तमान में आशायें स्व-सहायता समूह द्वारा किया जा रहा है लेकन जिन उद्देश्यों के तहत गढ़कलेवा को स्थापित किया गया है उस उद्देश्य से गढ़कलेवा को पृथक कर दिया गया है। आईटी सेल के सदस्यों का आरोप है कि गढ़कलेवा के संचालन में घोर लापरवाही एंव अनियमितता बरतते हुए, मनमानी ढंग से “गढ़कलेवा' के उद्देश्य के विपरीत निजी व्यसायिक प्रतिष्ठान की तरह काम किया जा रहा है जहां छ0ग0 के स्थानीय व्यंजनों और खान-पान की संस्कृति से ज्यादा प्राथमीकता चायनीज व्यंजन एवं अन्य कार्यक्रमो को दिया जा रहा है जिससे की "गढ़कलेवा' के मुख्य उद्देश्य को क्षति पहुंच रही है व उद्देश्य के अनुरूप
विपरीत संचालन किया जा रहा है जिसके खिलाफ जशपुर it सेल के अध्यक्ष नीरज पारीक,md इरफान,सौरभ लकड़ा,ओम तिवारी,रिजवी अंसारी,आफताब खान ने कलेक्टर जसपुर को आवेदन देते हुए संचालन नियुक्ति प्रकिया की जांच कराने एवम गढ़कलेवा के उद्देश्यों को सफल बनाने की दिशा में गढ़कलेवा के सफल संचालन हेतु पुनः योग्य संचालक नियुक्त करने की मांग की।।
लेकिन गढ़कलेवा का संचालन कर रही आशाएं स्व सहायता समूह की मुखिया हरमीत का कहना है कि गढ़कलेवा का उद्देश्य छात्तीसगढ़ी व्यंजनों को बढ़ावा देना है और गढ़कलेवा में छत्तीसगढ़ी व्यंजनों को बखूबी बढ़ावा दिया जा रहा है।स्थानीय व्यंजनों के अलावे अन्य फ़ूड बेचे जा रहे है ।स्थानीय व्यंजनों के अलावे अगर अन्य व्यंजन नहीं रखेंगे तो पेक्टिकली व्यवसाय नहीं हो सकता है । प्रदेश के अन्य शहरों की अपेक्षा जशपुर शहर की आबादी कम है और इतनी कम आबादी में केवल स्थानीय व्यंजनों को बेचकर व्यवसाय सम्भव नहीं है ।इसके अलावे उन्होंने यह भी बताया कि अनुबंध पत्र में ऐसा कुछ अनुबंध नहीं है कि केवल स्थानीय व्यंजन ही विक्री करना है ।हरमीत का कहना है कि उन्हें प्रतिमाह 15 हजार बतौर रेंट प्रशासन को अदा करना पड़ता है ।

