जशपुर मुनादी ।। जिले में पहाड़ी कोरवाओं की जमीन को लेकर एक बार फिर से मामला उछला है।इस बार भाजपा नेता के बेटे के द्वारा पहाड़ी कोरवा की जमीन गलत तरीके से अपने नाम कराने का मामला सामने आया है ।जिस पहाड़ी कोरवा की जमीन को भाजपा नेता के बेटे ने अपने नाम करा लिया उस पहाड़ी कोरवा ने प्रदेश के खाद्य एवं संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत को आवेदन देकर जमीन वापस कराने की मांग की है ।
नगर पंचायत बगीचा के लोटा निवासी पहाड़ी कोरवा दिलसाय पिता किर्री ने मंत्री अमरजीत भगत को बताया है कि बगीचा निवासी भाजपा नेता शुभाष अग्रवाल के बेटे आशीष अग्रवाल के द्वारा छलपूर्वक उसके जमीन का बेनामी अंतरण करा लिया गया है ।

दिलसाय ने मंत्री को दिए गये आवेदन में लिखा है कि उसका नाम पहाड़ी कोरवा विरहोर विकास अभिकरण जशपुर में 1587 नम्बर पर अंकित है।उसके द्वारा 1999 में ग्राम लोटा में खसरा नम्बर 326/2,329/3,329/4,रकबा 0.240,0.1210,0.0160, कूल रकबा0.1610 हेक्टेयर भूमि घसिया कोरवा से क्रय किया गया था ।उस जमीन पर आवेदक खेती करता रहा लेकिन बाद में आर्थिक दिक्कत के कारण वह खेती बाड़ी नहीं कर पाया उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के नेता शुभाष अग्रवाल के बेटे आशीष अग्रवाल के द्वारा छलपूर्वक बेनामी अंतरण कराकर उक्त जमीन को उनके नाम करा लिया गया।

आपको बता दें कि उक्त शिकायत दिसम्बर महीने में की गई है और अभी तक इस मामले में आगे की करवाई नही होने से मामला राजनीति रंग में रंगता जा रहा है। इस पूरे मामले में कांगेस अब भाजपा के उपर हमलावर हो गई है।

कांगेस के आदिवासी नेता शशि भगत ने मुनाड़ी डॉट कॉम को उक्त जमीन से सम्बंधित कई महत्वपूर्ण दस्तावेजो को भेजा है और कहा है कि पहाड़ी कोरवा की जमीन छलपूर्वक हथियाने का यह कोई पहला मामला नहीं है अगर प्रशासन इस मामले की जांच करे तो कई पहाड़ी कोरवाओं की जमीन छलपूर्वक बेनामी अंतरण किये जाने का बड़ा खुलासा हो सकता है और कई भाजपा नेताओं के नाम सामने आ सकते हैं।
इस मामले में जब मुनादी डॉट कॉम ने भाजपा नेता शुभाष गोयल से बात की तो उन्होंने बताया कि किसी प्रकार का कोई छल नहीं हुआ है ,छल पूर्वक पहाड़ी कोरवा की जमीन हथियाने के सारे आरोप बेबुनियाद और तथ्य से परे है। इस जमीन को लेकर 170 ख का विधिवत प्रकरण चला है ।170 ख के प्रकरण चलने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2013 में एसडीएम के द्वारा विधिवत तौर पर उनके बेटे आशीष अग्रवाल के नाम पर अंतर राशि लेकर जमीन का अंतरण किया गया है ।एसडीएम को ऐसा करने का पॉवर है।उन्होंने बताया कि इस मामले की जांच कमिश्नर कार्यालय और पूलिस के द्वारा भी की जा चुकी है और जाँच में वह सही पाए गए हैं ।


