जशपुर मुनादी।। पिछले काफी समय से बग़ीचा के पठारी और मैदानी क्षेत्रों में बकरे और बकरियों चोरी के मामले सामने आ रहे थे। यहां तक कि चोर बकरी चुराने के लिए लक्जरी गाड़ियों का भी उपयोग करने लगे हैं, ऐसे कई मामले पिछले दिनों थानों में कार्यवाही के दौरान आया है।
दरअसल यहां बकरियों को गरीब की गाय के रूप में देखा जाता है, लोग अपनी अकस्मात जरूरतों के लिए इनको बेचकर अपनी आवश्यकता को पूरा करते हैं, चाहे वह शादी, ब्याह, या बच्चों की पढ़ाई लिखाई, फीस, पुस्तक, कॉपी, जन्म, मरण जब भी जैसी आवश्यकता होती है, गरीब अपनी पाली इन बकरियों से ही आवश्यकताओ को पूरा करता है, ऐसे में जब किसी गरीब की बकरियां चोरी हो जाये तो उसकी स्थिति समझी जा सकती है, क्योकी क्षेत्र में यही उसकी पूरी जमा पूंजी होती है।
अब पुलिस ने भी सख्ती दिखानी शुरू की तो कार्यवाहियों से इन चोरों के होश उड़े हुए हैं। ताजा मामला बग़ीचा के पनडरापाठ सुलेसा चौकी का है। जहां बग़ीचा की ओर ले जाते एक पिकअप में 37 बकरे बकरियों समेत एक अपचारी के साथ एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर कार्यवाही की जा रही है। आरोपी बग़ीचा के बगडोल ग्राम निवासी अलाउद्दीन अंसारी बताया जा रहा है।
पुलिस को मुखबिरों ने दिनांक 06.03.2022 को चौकी प्रभारी पण्डरापाठ को सूचना दिया कि कोई अज्ञात व्यक्ति पीकअप वाहन में चोरी का बकरा बकरी लोड कर दनगरी से सुलेसा होते हुये बगीचा की ओर ले जा रहा है।
इस सूचना पर तत्काल सुलेसा एवं पण्डरापाठ पुलिस द्वारा बंधकोना के पास घेराबंदी शुरू की ही थी कि सामने से आती एक पिकअप दिखी। जिसका वाहन क्र.जे.एच.03 क्यू/7942 था, जब वाहन को रोककर तलाशी लिया गया तो उक्त वाहन में 37 बकरे और बकरियां खचाखच भरी हुई थी।
जब पुलिस ने बकरे बकरियों के संबंध में पीकअप वाहन में सवार अलाउद्दीन अंसारी से पूछताछ शुरू किया तो, आरोपी दस्तावेज ही प्रस्तुत नही कर पाये, और न ही सही जानकारी ही दि पाया जो खरीद-बिक्री से संबंधित हो।
पुलिस ने बकरियों को चोरी का होना संदेह होने पर जप्त कर आरोपी को दिनांक 06.03.2022 को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है, एवं सहआरोपी 17 वर्षीय अपचारी बालक को पूछताछ पश्चात् किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया है। वहीं बकरे -बकरी मालिकों की भी पता-तलाश की जा रही है।
प्रकरण की विवेचना एवं आरोपी की गिरफ्तारी में स.उ.नि. जुनास केरकेट्टा, स.उ.नि. जोसिक राम कुर्रे, प्र.आरक्षक कृपा सिंधु तिग्गा, आरक्षक. चुन्नू राम, कोसमोस, आनंद कुजूर, दाउद एक्का की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

