जशपुर मुनादी।। जिले में शिक्षा विभाग को लेकर अब लोगों का आक्रोश भी अब फूटने लगा है। न स्कूलों में शिक्षकों का ठिकाना न मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता! दावे बड़े बड़े हो रहे हैं कि ऐसा हो रहा है, ऐसा किया जा रहा है, पर जब सतह उतरकर नजरे फिरा लीजिए तो दिखेगा वही ढाक के तीन पात!
स्कूल के सामने लोगों ने लगाए नारे, खोली विभाग की पोल.
दरअसल हमे आज फोन आया भैया आइए न हमारे गांव! हमारे बच्चे बिना पढ़े रह जाए रहे हैं, स्कूल में तीन शिक्षक हैं पर कोई कभी आ गया तो बहुत है। इसलिए आज हम लोग स्कूल के सामने नारा लगा रहे हैं।
हम भी कौतूहल वश उस गांव की ओर चल दिया, जो जिले के बग़ीचा मुख्यालय से मात्र 13 किलोमीटर रहा होगा। दरअसल ये पूरा मामला ग्राम पंचायत कुरडेग, स्कूल प्राथमिक शाला कदमटोली का है। जहां हमने देखा यह गांव तो उरांव और कोरवा जनजाति का रहवासी स्थल है। देखा बड़े बूढ़े और महिलाएं इकट्ठा होकर शिक्षा विभाग हाय हाय! के साथ हमारे बच्चों को शिक्षा का अधिकार दो, वाकई गांव के लोग भी अब अधिकारों अपने बच्चों के माध्यम से सुंदर सपने सजाए हुए हैं, जब विभाग की कार्यप्रणाली इनके सपनो को चकनाचूर करे तो नाराजगी होगी ही।
प्रधान पाठक अपने बच्चों को स्कूल शिक्षक बनाकर पढ़ाने भेजते हैं..
जो उन्होंने बताया कहा कभी स्कूल में सभी शिक्षक नही रहते, कभी तो कोई भी नही रहता, हमने देखा स्कूल में मात्र एक महिला शिक्षक विमला भगत उपस्थित है, जिसको लेकर भी गांव वालों को शिकायतें है। प्रधान पाठक अमल सिंह का तो कहना ही नही स्कूल कभी आते नही, आएंगे तो उपस्थिति रजिस्टर में अपना हस्ताक्षर कर चले जायेंगे, गांव वाले कुछ बोलेंगे तो अपने बच्चों को पढ़ाने भेज देंगे। दूसरी महिला शिक्षक शर्मिला तिर्की जिनका भी स्कूल आने का कोई ठिकाना नहीं। आज ही इन दो शिक्षकों का तीन दिन से उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर नही है, मतलब तीन दिनों से बिना किसी को बताए गायब!ग्रामीणों का कहना है कभी कोई अधिकारी भी नही आते कि उनको इस बात को रखा जाए। अब तो रही यहां के शिक्षा व्यवस्था की बात।
पर यह भी जानिए यहां के मध्यान्ह भोजन को लेकर भी हालात-
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हमने यहां पहुंचकर सारी चीजों पर रिपोर्ट कर ही रहे थे कि मध्यान्ह भोजन का समय हो गया, बच्चे भोजन लेकर खाने बैठे हम भी वहां पहुंचे तो दंग रह गए! मीनू इतना बढ़िया लिखा हुआ कि मूह में पानी आ जाये, न्यूट्रीशियन की वो मात्रा की बच्चे कुपोषण का शिकार न हो। पर बच्चों को चावल और दाल देकर बोला गया यही खा लो, बाकी कुछ बना नही है। पूछा तो पता लगा कल भी चावल और दाल ही बस दिया गया था।
विभाग और उनके दावे..
विभाग दावा करती है कि हम मध्यान्ह भोजन का फोटो मंगा कर मोनिटरिंग कर रहे हैं, जो रोज के भोजन व्हाट्सएप्प फ़ोटो आता है, अब सवाल यह है कि जो विभागों को मध्यान्ह भोजन के फोटो मिल रहे हैं, लगातार दो दिनों से तो दाल और भात ही क्यों ? क्या दावे कर अपनी जिम्मेदारीयों से भागने की बात होती है, या कोशिश होती है पर उनकी कोई सुनता नहीं।
ऐसा नही की ग्रामीण सिर्फ आरोप लगा रहे थे, क्योंकि हालात की पुष्टि तो उपस्थित शिक्षिका और सचिव ने भी कर दी है। बहरहाल ये विभागीय दावों की खुलती हुई पोल को देख जानकर समझ गए होंगे, कि हकीकत कोसों दूर है, और झूठे दावों की लंबी फेहरिश्त…
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