गौरेला पेण्ड्रा मरवाही से अखिलेश नामदेव की मुनादी।। चिड़ियों का चहचहाना -पक्षियों का कलरव निश्चित ही सुकून देता है, बेहतर वातावरण का परिचायक है, परंतु इन दिनों बगीचे में एक ऐसी आवाज पक्षियों की आ रही है जो एक करुण क्रंदन करते हुए डरावनी आवाज है, यह पक्षी पहले कभी हमारे इलाके में नहीं देखा गया ,गिद्ध के आकार का यह पक्षी प्रवासी साइबेरियन जान पड़ता है, परंतु इसकी आवाज काफी डरावनी है ,रात के शांत वातावरण में यह आवाज और भी भयावह डरावनी हो जाती है इनकी संख्या आधा दर्जन के आसपास ही 1000-500 मीटर की उड़ान भर कर वापस आ जाते है…..
रात के अंधेरे में एक आवाज आई जो करुण क्रंदन कर रही थी, ऐसी आवाज जो शायद किसी बड़े संकट की ओर इशारा कर रही हो सुनकर मन कौंधा …मन सिहर उठा कि भला इतनी रात कौन रो रहा है ?,कौन चित्कार रहा है ? परंतु रात काफी थी उठकर जानने की चेस्टा नहीं की आवाज भला किसकी है ? सुबह -सुबह में भी वही आवाज जब सुनाई थी तो अपने घर के ऊपर चढ़कर देखने पर समझ में आया कि पीछे आम के विशाल वृक्ष से बार-बार रुक रुक कर ये आवाज आती है जो बड़े ही कर्कश और चित्कार भरी है ।
नजर- तेज की तो देखा आम के इस विशाल वृक्ष पर एक नए तरह का पक्षी अपना डेरा बसाय हुए… और उन्हीं के द्वारा की आवाज निकाली जा रही है, उनमें से एक पक्षी उड़ता तो दूसरा यह आवाज निकालने लगता है ,कुछ देर बाद जब पक्षी 1000-500 मीटर उड़ कर वापस आता तो पुनः की आवाज और तेज हो जाती मालूम चला यह पक्षी की ही आवाज है, जो अपने साथी पक्षी के उड़ने पर उसे बुलाने के लिए यह आवाज दे रहा है परंतु आवाज इतनी भयावह है कि निश्चित ही डर के मारे रूह कांप जाए।
पशु पक्षी प्रेमी एवं पर्यावरण विशेषज्ञ छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक प्राण चड्डा से मैंने जब इस पूरे मामले पर बातचीत की तो उन्होंने बताया कि इस पक्षी का नाम Red Naped Ibis, है।
( रेड नेपर्ड आइबिस)
ऊंचे पेड़ों पर यह घोंसला बनाती है। इसकी आवाज तीखी और लगातार होती है। कभी इसका दूर से साथी भी आवाज सुनकर संगत करता है।
यह स्थानीय पक्षी है। चोंच लम्बी और सामने झुकी । सिर पर लाल रंग की टोपी और दोनों बाजू में काले पँखो में सफेद पंख का धब्बा, नर मादा एक समान। आकार करीब 70 सेमी,।आँख की पुतली नारंगी रंग की।भोजन-फसल कटाई बाद खेतो में गिरा आनाज, छोटे सरीसृप आदि। अकेले यह छोटे झुंड में, दिखते हैं।

