21-March-2022


Jashpur Big Breaking कांग्रेस के इस बड़े नेता ने छोड़ दी कांग्रेस और थाम लिया "आप" का दामन, कहा-कांग्रेस में कौन रहेगा ,यहाँ तो…कांग्रेस के इस बड़े नेता का भी आया रिएक्शन ,कहा-3 सालों तक…



जशपुर मुनादी।। जिले की सियासत से बड़ी खबर आ रही है।40 वर्षो से काँग्रेस का हाथ पकड़कर चलने वाले कांग्रेस पार्टी के पूर्व विधायक प्रत्याशी सरहुल भगत ने आज कांग्रेस का दामन छोड़ दिया और आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए ।आम आदमी पार्टी के छग प्रभारी गोपाल राय की मौजूदगी में जिले भर के दर्जनों लोगों ने आम आदमी पार्टी की सदस्यता ली है लेकिन इन दर्जनों लोगों के बीच सरहुल भगत कांग्रेस पार्टी के बड़े चेहरे के रूप में जाने जाते हैं।

सरहुल भगत जिले के काफी पुराने कांग्रेस पार्टी के आदिवासी नेता के रूप में जाने जाते है।बिगत 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने इन्हें जशपुर विधानसभा से टिकट देकर चुनाव लड़ाया था ।हांलाकि सरहुल भगत भाजपा के राजशरण भगत से हार गए थे ।

सरहुल भगत ने मातृसंस्था कांग्रेस पार्टी को अलविदा कहने का कारण बताते हुए कहा कि वह बीते 40 वर्षो से लगातार कांग्रेस पार्टी की सेवा करते रहे ।जब कांग्रेस पार्टी का झंडा उठाने जशपुर में कोई तैयार नहीं था तब उन्होंने अपने जेब से पैसे लगाकर और पूरे जी जान लगाकर कांग्रेस पार्टी से लोगो को जोड़े रखा लेकिन जब 2018 में प्रदेश और जशपुर में सत्ता परिवर्तन हुआ तो उनके जैसे तमाम जमीनी कांग्रेसी नेताओं की उपेक्षा शुरू हो गई । उपेक्षा का दंश लगातार 3 साल तक झेलने के बाद कांग्रेस पार्टी को छोड़ने में ही भलाई समझा ।


उन्होंने आगे कहा कि पूरे देश मे आम आदमी पार्टी की लहर है और पूरा देश आम आदमी पार्टी को बड़े विकल्प कर रूप में देख रहा है । दिल्ली के बाद पंजाब में भारी बहुमत से सरकार बनाना इस बात का सबसे पुख्ता उदाहरण है।आखिरी में उन्होंने कहा कि यह कोई बड़ी बात नहीं कि छग में भी आम आदमी पार्टी की सरकार बनेगी ।

इस मामले में प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कांग्रेस पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष व माध्यमिक शिक्षा मंडल के सदस्य पवन अग्रवाल ने कहा कि जिन कार्यकर्ताओं ने पार्टी के लिए मेहनत की ,पार्टी को इतने वर्षों तक मजबूती के साथ खड़ा रखा और जशपुर जैसे जगह में काँग्रेस को 35 सालों बाद वापसी करवाया उनकी उपेक्षा और अनदेखी होतीरही।3 सालों से इन्हें पार्टी में पूछा नहीं जा रहा है ऐसे में उन्होंने दूसरा विकल्प ढूंढ लिया और कार्यकर्ता कहीं भी जाने को स्वतंत्र हैं । भला कोई किसी को कहीं आने जाने से कैसे रोक सकता है।








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