भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर आदिवासी नेता व पूर्व सांसद नन्दकुमार साय बहुत जल्द धर्मांतरण के विरोध में रथ यात्रा निकालने की तैयारी कर रहे है।बताया जा रहा है इनकी यह यात्रा बस्तर और सरगुजा सम्भाग पर फोकस रहेगा। इनके करीबी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि यह यात्रा बीते जनवरी माह में शुरू होने वाली थी लेकिन किन्ही कारणों से जनवरी में यह यात्रा प्रारंभ नहीं हो सकी लेकिन अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो अप्रेल में यह यात्रा शुरू कर दी जाएगी । बस्तर और सरगुजा के जनजातीय बाहुल्य अंचलों में विशेष तौर पर यात्रा के जरिये साय जनजातीय समुदाय को धर्मांतरण की असलियत बताएंगे और धर्मान्तरित हुए जनजातीय समुदाय को उनके मूल धर्म मे वापस लाने का काम किया जाएगा।
यह बताना जरूरी है कि मंगलवार को महासमुंद जिले के नुआ पड़ा कटंग पाली में आर्य समाज द्वारा आयोजित विश्व कल्याण यज्ञ में नन्दकुमार साय को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया था ।इस दौरान घरवापसी अभियान चला रहे भाजपा के प्रदेश मंत्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव की अगुवाई में करीब 200 लोगो के पैर धोकर उनके मूल धर्म मे वापसी कराया गया ।
ऐसा पहली दफा देखा गया जब नन्दकुमार साय घरवापसी जैसे अभियान में शामिल हुए ।नन्दकुमार साय आदिवासी हितों,आदिवासियों के अधिकार और आदिवासी नेतृत्व की खुलकर पैरवी करने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं लेकिन अब से पहले इन्हें घरवापसी अभियान या हिंदुत्ववादी मुद्दों पर इनके बयान नहीं आये ।2010 में जशपुर में काफी जोर से चल रहे जल जंगल जमीन के आंदोलन में नन्दकुमार साय ने भी काफी अहम भूमिका निभाई थी और इनकी कार्य शैली को देखते हुए भाजपा से खार खाये रहने वाला मिशनरीज वर्ग इनके साथ खड़ा हो गया था और इनकी अगुवाई में जल जंगल जमीन को लेकर मिशनरीज आदिवासियों ने बडी रैलियां भी निकाली थीं ।
बहरहाल ,यह राजनीति है और राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है ।वैसे भी अभी भाजपा के लिए हिंदुत्व बड़ा मुद्दा है और चुकी छग में 2023 में चुनाव होने है इस लिहाज से भाजपा अभी से ही कांग्रेस सरकार को घेरने के लिए धर्मांतरण के खिलाफ माहौल बनाने में लगी हुई है ।

