जशपुर मुनादी।।
जशपुर जिले की एक मजदूर की बेटी को जब अस्पताल में खून की जरूरत पड़ी तो परिवार समेत परिवारजन खून की तलाश में शहर की खाक छानते फिरते रहे, पर मदद कहीं से ना मिली। तब थक हारकर परिवार वापस अस्पताल आ गया। और जब कहीं से मदद की आस न रही तो मजबूर भाई कुनकुरी थाने पहुंच गया, और अपनी सारी परेशानी थाने में कह सुनाया, मौके पर उपस्थित थानेदार भाष्कर शर्मा ने अपना ही खून मजदूर की बेटी को दिया तो बेटी की जान बच सकी।
ये पूरा वाक्या जशपुर जिले के थाना कुनकुरी का है, जहां फरसाबहार धौरासाण्ड की बेटी की तबियत खराब हो गयी, तो उसे कुनकुरी के अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टरों ने इलाज के लिए खून की जरूरत बताया। चूंकि ब्लड बैंक में भी खून नही था, परिवार खून की तलाश में हाथ पांव मारने लगा, काफी कोशिशों के बाद भी जब खून नहीं मिला, तो एक मदद की आस लिए भाई कुनकुरी थाना पहुंचा, और नम आंखों से थानेदार भाष्कर शर्मा को सारी कहानी कह सुनाई, उम्मीदे थी जो आखिरी बची थी, इस बात को थानेदार भास्कर शर्मा अच्छी तरह समझ रहे थे, उन्होंने पूछा कौन सा ग्रुप है, मजबूर भाई बोला ओ पॉजिटिव!
थाना प्रभारी भास्कर शर्मा भी तपाक से बोले, ओह, अरे ये तो मेरा भी है, चलो मेरा खून आपकी बहन के काम आ जायेगा, पैदल थाने आये भाई को अपनी गाड़ी में बैठाया, और चल दिये अस्पताल ! और बेटी के लिए रक्तदान कर दिया। परिवार वालो ने भी रुंधे गले से धन्यवाद कहा, पर पिता कुछ कह न पाया, पर उसकी आँखों के बहते आंसू सारी कहानी खुद बयां कर रहे थे, ये दान और मदद उनके लिए कितना बड़ा था।
दरअसल ये पूरी कहानी रेशमा सिदार पिता दीपक सिदार , धौरासांड ,फरसाबहार ब्लॉक उम्र 22 वर्ष की है, जो आंध्रपदेश में एमआई मोबाइल कम्पनी में पार्ट्स की पैकिंग काम करती थी। कोरबा कौशल विकास केंद्र से प्रशिक्षण लेकर काम करने गई थी। पिता मजदूर हैं। और एक भाई भी, जिसने 12 वीं कुनकुरी कन्या शाला से पास की है। जो अपने गांव में आकर बीमार पड़ गयी थी।
वहीं जब रक्तदान की मार्मिक पहलू को समाजसेवी एवं प्रदेश अध्यक्ष रिपब्लिकन पार्टी आठवले के अध्यक्ष विजय गुप्ता को पता चला, तो वो भी थाने पहुंचे और मानवीय संवेदना के इस पहलू पर इस तरह खुद आगे आने पर थाना प्रभारी भास्कर शर्मा को खूब सराहा। उन्होंने रक्त की कमी से आईसीयू में भर्ती मरीज रेशमा के भाई को हिम्मत दी और ईलाज में पैसे की कमी नहीं होने देने का भी भरोसा दिया। कहा ये मेरी भी बेटी है।

