28-March-2022


जशपुर की बेटी ने बढ़ाया मान ,राज्यपाल से हूई सम्मानित , राज्यपाल ने दिया स्वर्णपदक ,पूरे इलाके में बिटिया की हो रही सराहना,पढ़िये पूरी खबर



पत्थलगांव मुनादी।। शहर की बेटी किरण लकड़ा ने रसायनशास़्त्र की स्नातकोत्तर परीक्षा में 80 प्रतिशत् अंकों के साथ स्वर्ण पदक हासिल कर शहर का मान बढ़ाया है। इस उपलब्धि के लिए संत गहिरा गुरू विश्वविद्यालय सरगुजा द्वारा आयोजित दीक्षांत समारोह में राज्यपाल अनुसुईया उइके ने किरण को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया। बेटी की इस उपलब्धि की जनप्रतिनिधियों के साथ ही स्थानीय लोगों ने भी जमकर सराहना की है।
कहा जाता है कि प्रतिभा किसी स्थान या फिर अवसर की मोहताज नहीं होती है। यदि व्यक्ति के दिल में जज्बा हो तो उंचा से उंचा मुकाम भी हासिल किया जा सकता है। पत्थलगांव की बेटी किरण लकड़ा ने इसे पूरी तरह चरितार्थ कर दिखाया है।

उन्हांने संत गहिरा गुरू विश्वविद्यालय सरगुजा द्वारा आयोजित रसायनशास़्त्र की स्नातकोत्तर परीक्षा में 80 प्रतिशत् अंक हासिल कर स्वर्ण पदक हासिल किया है। शहर की बेटी की इस उपलब्धि से शहर में खुशी की लहर दौड़ गई है। गौरतलब है कि किसान परिवार में जन्मी किरण पत्थलगांव के वार्ड क्रं 7 निवासी दिलसाय लकड़ा और संतोषी लकड़ा की पुत्री हैं। उन्होंने शहर के ही सरस्वती शिशु मंदिर से स्कूली शिक्षा प्राप्त की है। इस स्कूल के विद्यार्थी के रूप में छग माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित हायर सेकेण्डरी की परीक्षा में उन्होंने 87 प्रतिशत् अंक हासिल किए जिसके लिए उन्हें सरकार की ओर छात्रवृत्ति भी प्रदान की गई। किरण का कहना है कि बचपन से ही उनकी विज्ञान विषय में रूचि थी परंतु 11वीं में शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन ने रसायनशास्त्र में अध्ययन के लिए प्रेरित किया। इसके लिए किरण ने सरगुजा विश्वविद्यालय में दाखिला लिया।

यहां बीएससी की परीक्षा में उन्होंने रजत पदक हासिल किया। इसके बाद बारी आई स्नातकोत्तर की। इसमें अध्ययन के लिए उन्होंने अपने पसंदीदा विषय रसायनशास्त्र को चुना और सफलतापूर्वक परीक्षाएं उत्तीर्ण करते हुए स्नातकोत्तर की उपाधि 87 प्रतिशत् अंकों के साथ हासिल की। इस सफलता के लिए विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें स्वर्णपदक से सम्मानित किया गया। शनिवार को विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित दीक्षांत समारोह में राज्यपाल अनुसुईया उइके ने उन्हें यह पदक प्रदान किया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री श्रीमती रेणुका सिंह, छग शासन के स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव,शिक्षामंत्री एवं अन्य विधायकगणों व जनप्रतिनिधियों के साथ ही विश्वविद्यालय के कुलपति अशोक सिंह,कुलसचिव विनोद एक्का भी यहां उपस्थित रहे। किरण ने अपनी सफलता का श्रेय गुरूजनों के मार्गदर्शन के साथ ही परिवार के समर्थन को दिया है।

उनका कहना है कि परिवार के समर्थन के बिना यहां तक पहुंच पाना उनके लिए बहुत मुश्किल था। उन्होंने बताया कि बड़े भाइयों ने दिशा चुनने में उनकी मदद की वहीं माता-पिता हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे। पिता ने उन्हें अच्छी से अच्छी शिक्षा दिलाने का प्रयास किया जिससे उन्हें बेहतर शिक्षक और बेहतर मार्गदर्शन मिल सका। शहर की बेटी की इस उपलब्धि पर छग अनुसूचित जनजाति सलाहकार परिषद के उपाध्यक्ष तथा विधायक रामपुकार सिंह ने फोन कर उन्हें बधाई दी है। उन्होंने इसे शहर के साथ ही पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बताया है। उनका कहना है कि किरण की यह उपलब्धि अन्य बालिकाओं को भी शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करेग


रूचिकर होना चाहिए पढ़ाने का तरीका


आम तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों में विज्ञान विषय के प्रति रूचि अपेक्षाकृत कम देखने को मिलती है। परंतु बचपन से ही मेधावी रही किरण ने 10वीं के बाद विज्ञान को ही अपने प्रमुख विषय के रूप में न सिर्फ चुना अपितु उन्होंने इसमें सफलता भी प्राप्त की। इसे लेकर चर्चा में किरण ने विज्ञान विषय में ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों की रूचि को बढ़ाने के लिए पढ़ाने के तौर-तरीकों को रूचिकर बनाए जाने को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि विज्ञान विषय को कठिन मानकर विद्यार्थी इससे दूर भागते हैं परंतु इसकी प्रमुख वजह शिक्षा के तरीकों का रूचिकर नहीं होना है। उनका मानना है कि रूचिपूर्ण तरीके से प्रस्तुतिकरण से किसी भी विषय को सरल बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि उनमें रसायनशास्त्र के प्रति रूचि शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन से ही उत्पन्न हुई। पहले सरस्वती शिशु मंदिर के शिक्षकों ने इसे सरल बनाया वहीं विश्वविद्यालय के शिक्षकों से उनकी इस विषय पर पकड़ मजबूत हुई। उनका कहना है कि देश को अधिक संख्या में वैज्ञानिकों की आवश्यकता है जिसे अधिक से अधिक विद्यार्थियों के इस क्षेत्र में आगे बढ़ने पर ही पूरा किया जा सकता है।








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