02-April-2022


एसपी संतोष सिंह के प्रयास से मिल पाया न्याय, अज्ञात लाशों ने भी छोड़ दी थी आस, एसपी के दृढनिश्चय ने अंजाम तक पहुंचाया, पढिये पूरा मामला



रायगढ़ मुनादी।। 6 मई 2016 को रायगढ़ से 10 किमी दूर संबलपुरी गांव के पास दो अज्ञात मिली लाशों को आज अंततः न्याय मिला है। इस मामले के आरोपी ओडिशा के बड़े और रसूखदार नेता को आजीवन कारावास की सजा रायगढ़ के पंचम अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा दी गई। इस मामले को इस मुकाम तक पहुंचाना आसान काम नहीं था लेकिन कहते हैं बड़े इच्छाशक्ति से बड़े काम भी पलक झपकते हो जाते हैं, तो इस मामले में यही हुआ है। तत्कालीन एसपी संतोष सिंह की दृढ़ इच्छाशक्ति ने इस कठिन मामले को न सिर्फ सुलझाया बल्कि उसे अंजाम तक पहुंचा दिया।

शनिवार को दोपहर जैसे ही रायगढ़ के कोर्ट ने ओडिशा राज्य के ब्रिजराजनगर के पूर्व विधायक अनूप साय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई उस समय रायगढ़ के पूर्व एसपी संतोष सिंह को उन सभी लोगों ने याद किया जो इस मामले के बारे में थोड़ा बहुत भी जानते थे क्योंकि ऐसे मामले सुलझाने का दम बहुत कम लोगों में होता है। मामला सुलझ भी जाए तो उसे अंजाम तक पहुंचाने वाले कम होते हैं। यूं भी अज्ञात लोगों को न्याय दिलाने में कितने लोगों को दिलचस्पी होती है, लेकिन पूर्व एसपी संतोष सिंह के खाते में इस मामले का अंजाम जाता है जिससे मृत आत्माओं को कम से कम न्याय तो मिला।

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मई 2016 में जब संबलपुरी में दो अज्ञात महिलाओं की लाश मिली थी तब पुलिस को इन शवों के पहचान करने में ही पसीने छूट गए थे। महीनों बाद जब मृतक कल्पना दास के पति ने एक पोस्टर में अपनी पत्नी को छपा हुआ देखा तब उन शवों की पहचान के लिए DNA टेस्ट करवाया गया और यह तय हुआ कि मृतक कल्पना दास और बबली दास थे जो रिश्ते में माँ और बेटी थे। इसके बाद पूछताछ और तहकीकात शुरू हुई तो पूरा मामला खुलने लगा और धीरे-धीरे पूरा मामला खुल गया।

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लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह था कि बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधेगा ? क्योंकि जिस पर इन दो महिलाओं के मौत का शक था वह ओडिशा राज्य के सत्ता पक्ष का बड़ा ही रसूखदार नेता था। वह न सिर्फ पूर्व विधायक था बल्कि वहां के मुख्यमंत्री के चुनाव का संचालनकर्ता भी था। ऐसे में उसे पकड़ना किसी भी अधिकारी के लिए जबरन आग से खेलने जैसा काम था लेकिन एसपी संतोष सिंह तो जैसे आग के खिलाड़ी ही थे। उन्होंने जैसे ही रायगढ़ एसपी के बतौर जॉइनिंग दी उनके सामने से भी यह फ़ाइल गुजरी और उन्होंने अपने मातहतों से इस मामले की पूरी जानकारी ली।

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अब मामले का पूरा साक्ष्य इकट्ठा किया जाने लगा। जब साक्ष्य इकट्ठा हो गया तब एसपी संतोष सिंह के मार्गदर्शन में रायगढ़ पुलिस की टीम ने एक दिन यानि 13 फरवरी 2020 को इस मामले के मुख्य आरोपी और ओडिशा के रसूखदार सत्ताधारी दल के नेता अनूप साय को गिरफ्तार कर लिया। निश्चित रूप से इस मामले में दवाब भी रहा होगा और लालच भी दिया गया होगा लेकिन एसपी संतोष सिंह टस से मस नहीं हुए। उनको उन महिलाओं को न्याय दिलाना था जिन्हें लावारिश लाश बनाने की साजिश रची गयी थी।

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जब अनूप साय की गिरफ्तारी हुई थी उस समय तत्कालीन एसपी संतोष सिंह ने कहा था कि हम इस मामले को तार्किक परिणति तक ले जाएंगे, आज शनिवार को जब अनूप साय को आजीवन कारावास की सजा मिली तब यह मामला अपने तार्किक परिणति को प्राप्त हो गया। हालांकि विद्वान न्यायाधीश ने इसे रेयर ऑफ रेयरेस्ट केस नहीं माना लेकिन रायगढ़ के लोगों ने संतोष सिंह को रेयर ऑफ रेयरेस्ट एसपी जरूर माना जिन्होंने अज्ञात लोगों को न्याय दिलाने अपनी पूरी ताकत झोंक दी।








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