उपेन्द्र डनसेना की मुनादी।। चारो तरफ पहाड़ो और जंगलों से घिरे रायगढ़ जिले में गर्मी लगते ही वन्य प्राणियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसी ही एक घटना में आज सुबह घरघोड़ा ब्लाक के ग्राम छोटे गुमडा में एक बारहसिंघा भोजन और पानी की तलाश में पहुंच गया था। इस दौरान कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया और फिर अपनी जान बचाने बारहसिंघा गांव के खेत में बने एक कुंए में कूद गया। कई घंटे बाद रेस्क्यू कर बाहरसिंघा को कुंए से बाहर निकाला तो गया परंतु अत्याधिक चोट लगने की वजह से उसकी मौत हो गई।
विभाग के द्वारा वन्य प्राणियों की सुरक्षा व संरक्षण के दावे किये जाते हैं परंतु हर साल गर्मी के दिनों में भोजन व पानी की तलाश में रिहायशी क्षेत्र में घुस जाने से भटकते वन्य प्राणी कुत्तों के हमले से अपने प्राण त्याग देते हैं या फिर शिकारियों के द्वारा शिकार कर लिये जाते हैं।
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार रायगढ़ जिले के घरघोड़ा ब्लाक के अंतर्गत आने वाले ग्राम छोटे गुमड़ा में आज सुबह 7 बजे जंगल से निकलकर भोजन और पानी की तलाश में गांव तक पहुंचे एक बारहसिंघा पर कुत्तों ने हमला कर दिया। अपनी जान बचाने के लिए बारहसिंघा गांव के पास के खेत में बने कुँए में कूद गया, तब जाकर उसकी जान बच सकी थी। इस वन्य प्राणी के शरीर में चोट के निशान है। कुँए में गिरे बारहसिंघा गिरने की सूचना पर पूरा गांव वहां एकत्रित हो गया।
गांव के लोगों ने बताया कि गर्मी के चलते इस मिट्टी से बने कुँए में पानी कम होने से बारहसिंघा अभी तक जिंदा है और वह बाहर निकलने के लिए झटपटा रहा है। कुएं में गिरे इस जानवर को किसी किसान ने आज सुबह देखा उसके बाद भारी भीड़ वहाँ जमा हो गई। गाँव वालों के अनुसार जंगल से भटक कर ये बारहसिंघा कुत्तों के दौड़ाने से अचानक कुँए में जा गिरा था। बताया जा रहा है कि गांव वालों की सूचना के बाद कई घंटे बाद वन विभाग के टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू कर बाहरसिंघा को कुंए से बाहर निकाला गया, दौरान कई घंटो तक कंुए में रहने के कारण बारहसिंघा बेहोश गया है उसके उपचार हेतु उसे रायगढ़ लाने की सूचना मिल रही है।
बताया जा रहा है कि गांव वालों की सूचना के बाद कई घंटे बाद वन विभाग के टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू कर बाहरसिंघा को कुंए से बाहर निकाला गया, दौरान कई घंटो तक कंुए में रहने के कारण बारहसिंघा बेहोश गया था जहां वहां उपस्थित डाक्टर ने प्रारंभिक उपचार में ही अत्याधिक चोट लगने की वजह से उसकी मौत होनें की पुष्टि कर दी है।
बहरहाल रायगढ़ जिले के जंगलों में कई प्रकार के वन्य प्राणी यहां के जंगलों में विचरण करते हैं। जिसमें विलुप्ती के कगार पर पहुंच चुके वन्य प्राणी भी शामिल है। एक तरफ जहां गर्मी के दिनों में दवानल की लगातार होनें वाली घटनाएं सामने आते रहती है, इस आग की चपेट में आकर भी कई वन्य प्राणी अपने प्राण त्याग देते हैं। वहीं दूसरी ओर गर्मी में पतझड लगते ही वन्य प्राणी भोजन व पानी की तलाश में रिहायशी इलाकों में प्रवेश कर जाते हैं, हर साल गर्मी के दिनों में जंगली हाथी गांव की ओर रूख कर जाते हैं और फिर मानव हाथी के बीच द्वंद्व में इंसान की मौत हो जाती है। इसी प्रकार चीतल, हिरण, कोटरी, जंगली खरगोश, बरहा, आदि वन्य प्राणी भोजन पानी की तलाश में गांव की तरफ पहुंचते ही या तो कुत्तों के हमले से मारे जाते है या फिर उनका शिकार कर दिया जाता है। वन विभाग को वन्य प्राणियों के सुरक्षा की दृष्टि में कोई कारगर पहल करने की जरूरत है ताकि वन्य प्राणी जंगलों में ही सुरक्षित रह सकें।


इस संबंध में वन परिक्षेत्र के रेंजर लक्ष्मी प्रसाद श्रीवास्तव ने बताया कि 10 बजे बाहरसिंघा को कुंए से निकालने हेतु रेस्क्यू आपरेशन किया गया था, कुछ देर बाद उसे बाहर निकाला गया परंतु शहरी के अंदरूनी व बाहरी चोट अत्याधिक होनें की वजह से बचाया नही जा सका। अब मृत वन्य प्राणियों को सारंगढ़ क्षेत्र के गोमर्डा अभ्यारण्य ले जाया जा रहा है जहां उसे जंगली जानवरों के भोजन के लिए जंगल में छोड़ दिया जाएगा।
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