रायपुर(गौरव सिन्हा) मुनादी।।छत्तीसगढ़ पुलिस अब कई जिलों में नवाचार करती नजर आ रही है, जिससे छत्तीसगढ़ पुलिस को देश मे अब एक अलग पहचान भी मिलती दिख रही है, जो पुलिस की सामुदायिक पुलिसिंग को सीधा जनता से जोड़ तो रही है। वहीं जिलों में चल रही इन कवायदों का मूल सार यही है कि कैसे पुलिस अपने साथ पब्लिक पार्टिसिपेशन या जन भागीदारी को सुनिश्चित करे।
पुलिस का प्रथम दायित्व और 13 सोपान
पुलिसिया दायित्व की अगर बात की जाए तो उसमें प्रथम अपराधो की रोकथाम के साथ कानून व्यवस्था को बनाये रखना है, और इसकी संभावना दायित्वो की पूर्ति भी तभी यथार्थ में तब्दील होती दिखती है जब जनता से जुड़ाव के साथ पुलिस जनता की भागीदारी को भी सुनिश्चित करती है। और यह काम छत्तीसगढ़ पुलिस अपने 13 सोपानों से सुनिश्चित करती दिखती है।
छत्तीसगढ़ पुलिस के क्या हैं 13 सोपान ?
1.अभिव्यक्ति महिला सुरक्षा ऐप 2 मनवा नवा नार 3 एम-पासपोर्ट ऐप 4.लैंगिक समानता एवं महिला सशक्तिकरण सम्मेलन 5 पूनानकॉम अभियान 6.कवर्धा के अंजोर 7.पिंक गश्त 8 निजात अभियान 9 'छईहा" झूलाघर 10.दुर्गा फाईटरIL.11.हिम्मत 12.सुनो रायपुर 13.सामुदायिक पुलिसिंग के तहत संचालित कार्यक्रम
जशपुर एसपी के कार्यक्रम "विश्वास" को मिली जगह
इन तेरह सोपानों को पुलिस पुस्तिका की त्रैमासिक छपने वाले "न्यूज़ लेटर" में जगह मिली है। इसी क्रम जशपुर एसपी विजय अग्रवाल द्वारा शुरु किये गए कार्यक्रम "विश्वास" को भी जगह मिली है। पुलिस को लेकर प्रचलित धारणा यह रही है कि, जनता से उसका गैप होता है, और संवादों का अभाव।
पर जशपुर एसपी के शुरू किए गए कार्यक्रम "विश्वास" से इन धारणाओं को बदलने की पूरी कवायद है, और चीजें बदल भी रही है। जिसमे जनता से मित्रवत और मधुर संबंध बनाने की प्रक्रिया है, जो जनता और पुलिस के बीच मित्र की भूमिका सीधी अब नजर आ रही है।
जशपुर पुलिस की कवायद!
कवायद यही है कि पब्लिक पार्टिसिपेशन हो, समस्या सीधे जनता से निकले, और समस्याओं विवादों को गांव में ही बैठकर गांव के लोगों के साथ ही सुलझा लिया जाए। जब जशपुर पुलिस ये कवायद करती है तो गांव के प्रतिनिधियों के साथ ग्रामीणों को भी बुलाती है और लगाती है चौपाल ! जहां छोटे छोटे विवाद, शिकायत, और समस्याओं को लेकर ग्रामीण खुद पुलिस के साथ मिलकर निराकृत एक सौहार्द वातावरण के बीच कर लेते हैं।

